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Kashipur: मंडी समिति के प्रभारी सचिव को 1.20 लाख की रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा, लाइसेंस रिन्यूअल के नाम पर की थी अवैध मांग

On: July 23, 2025 9:42 AM
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उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। कृषि उत्पादन मंडी समिति के प्रभारी सचिव पूरन सिंह सैनी को विजिलेंस टीम ने 1.20 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। यह राशि उन्होंने फल-सब्जी मंडी में दुकानों के लाइसेंस रिन्यूअल के नाम पर दो दुकानदारों से मांगी थी।

दुकानदारों से मांगी गई मोटी रकम

ग्राम सरवरखेड़ा के निवासी शफायत चौधरी और शकील चौधरी मंडी समिति में पिछले 9-10 वर्षों से दुकान चला रहे हैं। हर वर्ष लाइसेंस नवीनीकरण की प्रक्रिया होती है। इस बार भी लगभग 30 दुकानों के लाइसेंस रिन्यू किए जाने थे। दोनों दुकानदारों ने करीब 8-10 दिन पहले आवेदन दिया था, जिसके बाद प्रभारी सचिव पूरन सिंह सैनी ने उनसे बातचीत शुरू की और लाइसेंस रिन्यूअल के एवज में मोटी रकम की मांग की।

विजिलेंस टीम ने की दबिश, मंडी परिसर में मचा हड़कंप

शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस विभाग ने जाल बिछाया और रिश्वत लेते ही पूरन सिंह सैनी को रंगेहाथ पकड़ लिया। टीम ने देर रात तक पूछताछ जारी रखी। जैसे ही गिरफ्तारी की खबर फैली, मंडी समिति परिसर में हड़कंप मच गया। बड़ी संख्या में व्यापारी और कर्मचारी कार्यालय के बाहर जमा हो गए। पुलिस ने किसी को भी परिसर के भीतर जाने की अनुमति नहीं दी। समाचार लिखे जाने तक विजिलेंस टीम की जांच जारी थी और अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

दो महीने पहले ही बना था प्रभारी सचिव, जल्द होने वाला था रिटायर

विभागीय सूत्रों के अनुसार, पूरन सिंह सैनी दो महीने पहले ही प्रभारी सचिव नियुक्त हुए थे। इससे पहले वह लगभग 15-20 साल तक मंडी समिति में अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत रहे। महज 7-8 महीने बाद वह सेवानिवृत्त होने वाले थे, लेकिन इससे पहले ही विजिलेंस ने उन्हें रंगेहाथ पकड़ लिया।

पहले भी भ्रष्टाचार के आरोपों में रहे हैं चर्चा में

शफायत चौधरी और शकील चौधरी का कहना है कि पूरन सिंह सैनी अपने पहले कार्यकाल के दौरान भी रिश्वतखोरी को लेकर बदनाम रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले भी कई बार उनके खिलाफ शिकायत की गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी थी। व्यापारी वर्ग में वह हमेशा से चर्चा में बने रहे हैं।

लाइसेंस रिन्यूअल के नाम पर तय थी वसूली दरें

मंडी समिति के व्यापारियों का कहना है कि लाइसेंस रिन्यूअल की सरकारी फीस मात्र 250 रुपये है, लेकिन इसके बावजूद अधिकारी 35 से 60 हजार रुपये तक की मांग करते हैं। फल मंडी के दुकानदारों से 60 हजार रुपये और अनाज मंडी के दुकानदारों से 35 हजार रुपये तक की अवैध वसूली की जाती रही है।

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