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उत्तराखंड पंचायत चुनाव: आपदा से निपटने की व्यापक तैयारी, कल से शुरू होगी पोलिंग पार्टियों की रवानगी

On: July 20, 2025 5:48 AM
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उत्तराखंड के 12 जिलों (हरिद्वार को छोड़कर) में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की प्रक्रिया अपने निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। दो चरणों में होने वाले इस चुनाव के पहले चरण के लिए पोलिंग पार्टियां 21 जुलाई से रवाना होंगी। राज्य निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार ने बताया कि निर्वाचन आयोग ने सभी स्तरों पर पूरी तैयारी कर ली है और मानसून के दौरान संभावित आपदा से निपटने की भी व्यापक योजना बनाई गई है।

मतदान की तैयारियां पूरी, 24 जुलाई को पहले चरण का मतदान

हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"

राज्य निर्वाचन आयुक्त के अनुसार, सभी 12 जिलों में चुनाव की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है। बैलेट बॉक्स और बैलेट पेपर जैसी सामग्री पहले ही संबंधित जिलों को वितरित की जा चुकी है।
21 जुलाई से पोलिंग पार्टियों की चरणबद्ध रवानगी शुरू होगी। इसी तरह, 28 जुलाई को होने वाले दूसरे चरण के लिए भी पार्टियों को तीन दिन पहले से रवाना किया जाएगा। शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए जिला प्रशासन को सभी आवश्यक दिशा-निर्देश दे दिए गए हैं।

स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ

मानसून बनी चुनौती, मगर तैयार है प्रशासन

जब यह चुनाव वर्षाकाल के दौरान हो रहे हैं, तो आपदा की आशंका भी बनी हुई है। इस पर निर्वाचन आयुक्त ने स्पष्ट किया कि सभी जिलों में आपातकालीन योजनाएं तैयार हैं।
मुख्य और वैकल्पिक मार्गों को खुले रखने की दिशा में काम किया जा रहा है। चुनाव ड्यूटी में लगे कार्मिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही ग्राम पंचायत स्तर पर बूथ स्थापित किए गए हैं, जिससे मतदाताओं को कठिनाई न हो। संबंधित विभागों के कर्मचारियों को मतदान समाप्ति तक ग्रामीण क्षेत्रों में ही रहने के निर्देश दिए गए हैं।

आपदा की स्थिति में पुनर्मतदान विकल्प

यदि किसी स्थान पर आपदा के कारण मतदान प्रक्रिया बाधित होती है, तो वहां पुनर्मतदान कराया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर पहले चरण में प्रभावित क्षेत्र का मतदान दूसरे चरण के साथ भी कराया जा सकता है। आयोग की प्राथमिकता हर नागरिक को मतदान का अधिकार सुनिश्चित करना है।

विवादों पर आयोग का पक्ष

पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को लेकर उठे कुछ विवादों पर प्रतिक्रिया देते हुए निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग संविधान और पंचायती राज अधिनियम के अंतर्गत कार्य करता है। 2019 में भी चुनाव इसी व्यवस्था के तहत कराए गए थे। आयोग कानून से बंधा है और उसी के अनुसार चुनाव संचालन हो रहा है।

मतदाता सूची और नामांकन को लेकर उठे प्रश्न

मतदाता सूची में नाम और कुछ प्रत्याशियों के नामांकन से जुड़ी शिकायतों पर आयोग का कहना है कि अधिकांश मामलों पर न्यायालय में सुनवाई जारी है, इसलिए सार्वजनिक टिप्पणी करना उचित नहीं। हालांकि, टिहरी और चंपावत जैसे जिलों में अदालत के आदेश पर कुछ प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटित किए जा चुके हैं।

मतदाताओं से अपील: लोकतंत्र को करें मजबूत

राज्य निर्वाचन आयुक्त ने सभी मतदाताओं से अनुरोध किया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में मतदान करें और अपने मताधिकार का प्रयोग कर लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करें। दिव्यांग व अशक्त मतदाताओं के लिए सहायक की व्यवस्था की गई है। सभी जिलों में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं जो ऐसे मतदाताओं को आवश्यक सहायता प्रदान करेंगे।

निष्कर्ष:
उत्तराखंड में पंचायत चुनाव केवल एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राज्य निर्वाचन आयोग ने वर्षा और आपदा की चुनौतियों के बावजूद इसे सफल बनाने के लिए हर जरूरी कदम उठाए हैं। अब बारी जनता की है कि वह लोकतंत्र के इस उत्सव में पूरे उत्साह से भाग ले।

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