डोईवाला/देहरादून। कांवड़ यात्रा के दौरान देहरादून-हरिद्वार मार्ग पर लच्छीवाला रेंज स्थित मणी माई मंदिर के पास एक भंडारे में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब अचानक तीन हाथी वहां आ पहुंचे। साउंड सिस्टम की तेज आवाज और लोगों के शोरगुल से गुस्साए हाथियों ने मौके पर खड़ी दो ट्रॉलियां पलट दीं, जिससे कांवड़ियों में भगदड़ मच गई। हालांकि, समय रहते वन विभाग की टीम ने मोर्चा संभाल लिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
तेज आवाज और छेड़छाड़ से भड़के हाथी
शनिवार रात करीब 8:30 बजे एक नर, एक मादा और उनके शावक को जंगल पार कर सड़क के दूसरी ओर जाना था। लेकिन रास्ते में मणी माई मंदिर के पास लगे भंडारे में बज रहे तेज साउंड सिस्टम और भीड़ के शोर ने हाथियों को विचलित कर दिया। मौके पर मौजूद कुछ कांवड़िए हाथियों की वीडियो बनाने लगे और उन्हें चिढ़ाने की कोशिश की। इससे हाथी आक्रोशित हो गए और दो ट्रॉली पलट दीं।
वन विभाग और पुलिस ने संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलते ही वन दरोगा पूरन सिंह रावत के नेतृत्व में वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। टीम ने भंडारा स्थल खाली करवाया और बम पटाखों की मदद से हाथियों को सुरक्षित जंगल की ओर वापस खदेड़ दिया। वहीं, पुलिस ने भी मौके पर पहुंचकर ट्रैफिक व्यवस्था को नियंत्रित किया और कांवड़ियों को वन क्षेत्र में न रुकने की हिदायत दी।
हाथी कॉरिडोर में भंडारा लगाना बना खतरा
लच्छीवाला क्षेत्र हाथी कॉरिडोर के अंतर्गत आता है। यह इलाका हाथियों के प्राकृतिक आवागमन का मार्ग है। ऐसे में तेज आवाज वाले आयोजन वन्यजीवों की दिनचर्या को बाधित करते हैं और उन्हें आक्रामक बना सकते हैं। टोल प्लाजा सुपरवाइजर राकेश नौटियाल और अरुण ने बताया कि यदि हाथी पंडाल के भीतर घुस जाते, तो स्थिति भयावह हो सकती थी, क्योंकि उस समय वहां सैकड़ों लोग मौजूद थे।
वन्यजीवों के एकांत में न डालें खलल
इस घटना ने फिर यह चेताया है कि वन क्षेत्रों में बिना योजना और अनुमति के बड़े आयोजन नहीं किए जाने चाहिए। जंगलों में तेज साउंड सिस्टम और अनियंत्रित भीड़ वन्यजीवों के लिए तनाव का कारण बन सकती है, जिससे उनकी आक्रामकता बढ़ती है और जनहानि की आशंका भी बढ़ जाती है।
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