देहरादून के सहसपुर स्थित शंकरपुर क्षेत्र में करोड़ों रुपये की जमीन धोखाधड़ी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत, उनकी पत्नी दीप्ति रावत, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष लक्ष्मी सिंह राणा समेत पांच लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।
ईडी की इस कार्रवाई पर हरक सिंह रावत की पहली प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने इसे पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि यदि उन पर लगे आरोप साबित हो जाते हैं तो वह सार्वजनिक जीवन से संन्यास ले लेंगे और ईडी अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई भी करेंगे। रावत ने दावा किया कि उनके पास जमीन से जुड़े सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं और यह बात ईडी को भी ज्ञात है, लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते चार्जशीट दाखिल की गई है।
क्या है पूरा मामला?
जमीन फर्जीवाड़े का यह मामला सहसपुर थाने में दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है, जिसके आधार पर ईडी ने जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि हरक सिंह रावत ने अपनी पत्नी दीप्ति रावत, नजदीकी सहयोगी लक्ष्मी सिंह राणा, बीरेंद्र सिंह कंडारी, और सुशीला रानी (अब दिवंगत) के साथ मिलकर करोड़ों रुपये की जमीन को बेहद कम कीमत में खरीदकर अपने और परिजनों के नाम पर दर्ज करवा लिया।
ईडी के अनुसार, सुशीला रानी ने कथित रूप से षड्यंत्र के तहत जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी बीरेंद्र सिंह कंडारी को दी, जिसने बाद में ये संपत्तियाँ दीप्ति रावत और लक्ष्मी सिंह राणा को सर्किल रेट से भी कम कीमत पर बेच दीं। आरोप है कि दीप्ति रावत द्वारा खरीदी गई जमीन पर अब दून इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (जो पूर्णा देवी मेमोरियल ट्रस्ट के तहत संचालित है) चल रहा है, जिसे हरक सिंह रावत और उनके करीबी लोग संचालित करते हैं।
70 करोड़ की संपत्ति अटैच
ईडी ने इस मामले में जनवरी 2025 में लगभग 101 बीघा भूमि, जिसकी सरकारी कीमत लगभग 6.56 करोड़ रुपये और बाजार मूल्य 70 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई, को अस्थायी रूप से अटैच किया था। कई चरणों की पूछताछ और दस्तावेजी जांच के बाद ईडी ने पांचों आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है।
हरक सिंह रावत का कहना है कि वह न्यायपालिका पर भरोसा रखते हैं और सच जल्द ही सामने आ जाएगा। वहीं ईडी मामले को कानून के अनुसार आगे बढ़ा रही है और अब अदालत में सुनवाई की प्रक्रिया शुरू होगी।





