उत्तराखंड में अब इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) तकनीक से गर्भधारण की इच्छुक महिलाओं को राहत मिलने वाली है। राज्य सरकार अब महिलाओं के लिए अधिकतम आयु सीमा को 39 से बढ़ाकर 50 वर्ष करने जा रही है। इसी तरह, सहयोगी पुरुष की अधिकतम उम्र 55 वर्ष निर्धारित करने की योजना है। यह कदम उन महिला कर्मियों के लिए उपयोगी होगा, जिन्हें अब तक उम्र सीमा के चलते चिकित्सा प्रतिपूर्ति की सुविधा नहीं मिल पा रही थी।
हालांकि, प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में पहले से ही महिलाओं को IVF के ज़रिए गर्भधारण कराया जा रहा है, लेकिन वर्ष 2021 में तय की गई नई आयुसीमा विभागीय दस्तावेजों में औपचारिक रूप से शामिल नहीं हो पाई थी। परिणामस्वरूप, 39 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को नियमों के तहत इलाज के खर्च की प्रतिपूर्ति नहीं मिल रही थी। वर्तमान में, राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाली प्रतिपूर्ति वर्ष 2012 में तैयार की गई नीति के अनुसार ही जारी है, जिसमें महिलाओं के लिए 39 वर्ष और पुरुषों के लिए 50 वर्ष की सीमा तय है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, केंद्र सरकार की IVF नीति को राज्य में भी अपनाया जा चुका है और यह सेवा प्रदेश के सभी प्रमुख जिलों के सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है। लेकिन दस्तावेजों में पुराने नियम लागू होने के कारण आयुसीमा को लेकर भ्रम और परेशानी बनी हुई थी। यही वजह रही कि हाल ही में वित्त विभाग ने 39 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं के प्रतिपूर्ति दावों पर आपत्ति जताई।
अब स्वास्थ्य विभाग इस भ्रम को दूर करने के लिए आयुसीमा को अद्यतन करने का प्रस्ताव तैयार कर चुका है। विभागीय सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने पुष्टि की है कि यह संशोधित प्रस्ताव जल्द ही राज्य कैबिनेट की मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे महिला कर्मियों को IVF उपचार में मिलने वाली सुविधाओं का लाभ बिना बाधा के मिल सके।
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