देहरादून। उत्तराखंड के इतिहास के एक गौरवशाली पात्र पुरिया नैथानी को अब स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थी उनके प्रेरणादायक जीवन और ऐतिहासिक योगदान के बारे में पढ़ सकेंगे। 1 जुलाई से प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में यह अध्याय पढ़ाया जा रहा है।
इस बदलाव के पीछे पुरिया ट्रस्ट का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ट्रस्ट के संस्थापक निर्मल नैथानी और अध्यक्ष सुनील नैथानी ने लंबे समय तक सरकार और संबंधित समितियों से संपर्क बनाए रखा और ऐतिहासिक प्रमाण प्रस्तुत किए। करीब एक वर्ष तक चली प्रक्रिया के बाद शिक्षा विभाग की समिति और एससीईआरटी के विशेषज्ञों ने इस प्रस्ताव को स्वीकृति दी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उनकी कैबिनेट ने ‘हमारी विरासत व विभूतियां’ नामक पुस्तक का विमोचन किया था, जिसमें पुरिया नैथानी के जीवन चरित्र को शामिल किया गया है। इस पुस्तक को राज्य की सांस्कृतिक धरोहर और ऐतिहासिक विभूतियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
शिक्षा विभाग ने ‘एससीईआरटी’ के विशेषज्ञों की मदद से इस विषय को बच्चों के स्तर के अनुरूप सरल भाषा में तैयार किया है। अधिकारियों को इसके शिक्षण के तरीकों के बारे में पहले ही वर्चुअल माध्यम से जानकारी दी जा चुकी है और जल्द ही शिक्षकों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
पुरिया नैथानी को ‘गढ़ चाणक्य’ कहा जाता है। उनके समय में देश मुगल सम्राट औरंगजेब के शासन में था। उस दौर में जनता पर जजियाकर का अत्यधिक बोझ था। गढ़वाल क्षेत्र में तो हालात और भी बदतर थे। एक ओर मुगलों द्वारा वसूला जाने वाला कर था और दूसरी ओर भीषण सूखा, जिससे लोग भुखमरी के कगार पर पहुंच गए थे।
इन विषम परिस्थितियों में गढ़ नरेश ने अपने सबसे बुद्धिमान मंत्री पुरिया नैथानी को मुगल दरबार में भेजा। अपनी चतुराई और कूटनीति से उन्होंने औरंगजेब को गढ़वाल पर जजियाकर खत्म करने के लिए राजी कर लिया। यह ऐतिहासिक घटना गढ़वाल के लोगों के लिए राहत लेकर आई और पुरिया नैथानी के नाम को इतिहास में अमर कर गई।
उत्तराखंड की नई पीढ़ी अब इस महान विभूति के जीवन संघर्ष और बुद्धिमत्ता से परिचित होगी, जो राज्य के गौरवशाली अतीत का महत्वपूर्ण अध्याय है।






