उत्तराखंड सरकार ने अब सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे को लेकर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर राज्य सरकार ने अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लेते हुए “उत्तराखंड गवर्नमेंट एसेट मैनेजमेंट सिस्टम (UKGAMS)” शुरू किया है। इस सिस्टम के तहत अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) ने 50 सेंटीमीटर उच्च रिजॉल्यूशन वाले सैटेलाइट के माध्यम से सभी विभागों की जमीनों की मैपिंग की है और बफर जोन बनाए हैं। इन बफर जोन पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से लगातार निगरानी की जा रही है।
बीते छह महीनों में AI ने देहरादून, ऊधमसिंहनगर और नैनीताल जिलों में सरकारी जमीनों पर 188 अवैध अतिक्रमणों की पहचान की। AI ने न सिर्फ कब्जे की सूचना दी, बल्कि उस स्थान की सटीक वर्चुअल लोकेशन भी विभागों को उपलब्ध करवाई। इससे विभागीय टीमों को मौके पर पहुंचने और अतिक्रमण हटाने में तेजी आई। अकेले देहरादून में सबसे अधिक अलर्ट मिले, जिनमें राजस्व परिषद, नगर निगम, स्वास्थ्य, जल संस्थान, पशुपालन समेत कई विभाग शामिल रहे।
इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका संचालन मोबाइल से भी संभव है। यूसैक की निदेशक नितिका खंडेलवाल के अनुसार, अलर्ट आने पर विभागीय टीम मोबाइल एप के जरिए मौके पर जाकर कार्रवाई करती है और फोटो-वीडियो अपलोड करती है। AI उस डाटा को विश्लेषित कर अलर्ट को अपडेट कर देता है। यह तकनीक न सिर्फ निगरानी को आसान बनाती है, बल्कि कार्रवाई को भी त्वरित बनाती है।
सरकार को अब सेटेलाइट आधारित सिस्टम के जरिए एक क्लिक पर यह जानकारी उपलब्ध है कि कौन सी सरकारी जमीन खाली है। इससे भविष्य की विकास योजनाओं में जमीन की उपलब्धता की पहचान करना बेहद आसान हो गया है। यह तकनीकी पहल राज्य की संपत्तियों की सुरक्षा और योजनाओं के क्रियान्वयन दोनों में एक क्रांतिकारी बदलाव लेकर आई है।
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