उत्तराखंड में केंद्र सरकार की अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना के तहत गड़बड़ियों की शिकायतों के बाद अब कई शिक्षण संस्थानों की जांच शुरू हो गई है। धामी सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के लिए ठोस रणनीति तैयार की है। शासन ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे संयुक्त जांच कमेटियों का गठन कर तेजी से इस मामले की छानबीन करें।
राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP) पर किए गए डेटा विश्लेषण से वर्ष 2021-22 और 2022-23 में कई स्कूल और संस्थान संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त पाए गए हैं। इसके बाद मार्च 2025 में केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने पूरे प्रकरण की गहराई से जांच कर दोषियों पर कानूनी कार्रवाई के निर्देश राज्यों को भेजे थे। मंत्रालय ने साथ ही उन संस्थानों की सूची भी साझा की है जो संदिग्ध पाए गए हैं।
उत्तराखंड शासन ने इन निर्देशों के क्रम में जिलों को यह सूची भेज दी है और जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सचिव अल्पसंख्यक कल्याण धीराज सिंह गर्ब्याल ने बताया कि सभी जिलों को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए हैं। इससे स्पष्ट है कि सरकार इस मामले में कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहती।
प्रत्येक जिले में उपजिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित की जा रही जांच कमेटी में खंड शिक्षा अधिकारी, सहायक अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी और सहायक समाज कल्याण अधिकारी को शामिल किया गया है। इन समितियों का उद्देश्य पारदर्शिता के साथ जांच कर दोषियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है। अब देखना होगा कि यह जांच किन-किन संस्थानों की साख पर सवाल खड़े करती है और छात्रवृत्ति योजनाओं में पारदर्शिता कितनी बहाल हो पाती है।
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