देहरादून में रविवार को आयोजित नवोदय विद्यालय समिति की लैब अटेंडेंट भर्ती परीक्षा के दौरान बड़ा नकल रैकेट सामने आया है। यह परीक्षा केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा शहर के दो प्रमुख परीक्षा केंद्रों—पटेलनगर स्थित सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल और डालनवाला स्थित दून इंटरनेशनल स्कूल—में दो पालियों में आयोजित की गई थी।
पहली पाली के दौरान सोशल बलूनी स्कूल के केंद्र अधीक्षक की सतर्कता से एक अभ्यर्थी पर शक हुआ, जिसके पास तलाशी लेने पर जूते में छुपाया गया ब्लूटूथ डिवाइस मिला। आरोपी की पहचान उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ निवासी सौरभ यादव के रूप में हुई, जिसे तुरंत पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
इसके बाद जब दूसरी पाली की परीक्षा शुरू हुई, तो पुलिस और केंद्र प्रशासन ने सतर्कता और जांच बढ़ाई। उसी केंद्र से सात और अभ्यर्थी ब्लूटूथ डिवाइस के साथ पकड़े गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए डालनवाला थाने की एक टीम ने दूसरे केंद्र—दून इंटरनेशनल स्कूल—में छापा मारा, जहां से नौ अन्य अभ्यर्थियों को इसी तरह की डिवाइस के साथ रंगे हाथों पकड़ा गया।
दो थानों में मुकदमा दर्ज, सॉल्वर गैंग की तलाश तेज
देहरादून के एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि अब तक कुल 17 अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया गया है और उनके पास से ब्लूटूथ डिवाइस बरामद हुई हैं। इन डिवाइसों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। पुलिस को शक है कि इस नकल प्रकरण के पीछे एक सॉल्वर गैंग सक्रिय है, जो देहरादून के बाहर से संचालित हो रहा है।
पुलिस ने पटेलनगर और डालनवाला थानों में तीन अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए हैं। जांच के लिए कई टीमें गठित की गई हैं, जो उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में दबिश दे रही हैं।
गिरफ्तार अभ्यर्थियों की सूची
सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल से गिरफ्तार:
सौरभ यादव (आजमगढ़, उत्तर प्रदेश)
अमन (हिसार, हरियाणा)
रोबिन (बागपत, उत्तर प्रदेश)
अक्षय मान (सिनौली, बागपत, उत्तर प्रदेश)
नीरज मान (सिनौली, बागपत, उत्तर प्रदेश)
मोहित कुमार (बड़कला, जींद, हरियाणा)
अंकुश (हिसार, हरियाणा)
मनीष मलिक (मेरठ, उत्तर प्रदेश)
दून इंटरनेशनल स्कूल से गिरफ्तार:
इलू माला वेंकटेश
राकेश
विशाल भर
ज्योति
पवन
अखिल
साहिल
अंकुर ग्रेवाल
जांच जारी, जल्द हो सकते हैं और खुलासे
पुलिस अधिकारी के अनुसार, पकड़े गए अभ्यर्थियों से पूछताछ के आधार पर सॉल्वर की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। साथ ही, यह भी पता लगाया जा रहा है कि परीक्षा के दौरान ये लोग किसके संपर्क में थे और उन्हें बाहर से कैसे सहायता मिल रही थी। माना जा रहा है कि गैंग तकनीकी संसाधनों के जरिए दूर बैठकर सवालों के उत्तर दे रहा था।
इस पूरे प्रकरण ने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं सीबीएसई और नवोदय विद्यालय समिति की साख भी दांव पर लग गई है।
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