प्रयागराज हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा या भर्ती प्रक्रिया में केवल चयन हो जाने का मतलब यह नहीं है कि उस व्यक्ति को नौकरी पर रखने का पूरा अधिकार मिल जाता है। कोर्ट ने साफ किया कि चयन एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन अंतिम नियुक्ति का फैसला नियोक्ता (सरकारी या निजी संस्था) के हाथ में होता है। हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि नियोक्ता बिना किसी उचित और वैध कारण के किसी चयनित उम्मीदवार की नियुक्ति को रद्द नहीं कर सकता। अगर किसी का चयन हुआ है और उसके बाद उसे नौकरी नहीं दी जाती, तो उसके पीछे ठोस कारण होना जरूरी है। यह फैसला उन मामलों में बेहद अहम माना जा रहा है, जहाँ उम्मीदवारों का चयन तो हो जाता है, लेकिन बाद में विभिन्न कारणों से नियुक्ति प्रक्रिया रोक दी जाती है या रद्द कर दी जाती है। हाईकोर्ट ने यह भी जोड़ा कि हर चयनित उम्मीदवार के साथ न्याय होना चाहिए और नियोक्ता को किसी भी निर्णय में पारदर्शिता बरतनी चाहिए ताकि उम्मीदवारों के अधिकार सुरक्षित रहें।
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