जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में एक आतंकी हमला हुआ, जिसमें आतंकियों ने सेना की वर्दी पहनकर हमला किया। इस घटना के बाद सरकार और सुरक्षा एजेंसियां बेहद सतर्क हो गई हैं। क्योंकि वर्दी पहनकर हमला करना लोगों को गुमराह करने का तरीका बन गया है, इसलिए अब सरकार ने सेना और पुलिस की वर्दी की खुली बिक्री पर सख्त रोक लगाने का फैसला किया है।
इस हमले के बाद उत्तराखंड में भी सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए जा रहे हैं। देहरादून में जगह-जगह चेकिंग की जा रही है, गाड़ियों और लोगों की तलाशी ली जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों को किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।
इसके साथ ही देहरादून और उधम सिंह नगर में NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) ने दो हथियार डीलरों के घरों पर छापेमारी की है। इन डीलरों पर हथियारों की गैरकानूनी खरीद-फरोख्त का शक है, और जांच अभी जारी है।
उधर उत्तरकाशी में भी माहौल थोड़ा तनावपूर्ण हो गया है। एक मस्जिद को लेकर विवाद के बाद कुछ दक्षिणपंथी नेताओं ने इलाके में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की कोशिश की, जबकि वहां धारा 144 लागू थी (जो भीड़ इकट्ठा करने से रोकती है)। पुलिस ने नियम तोड़ने पर उन नेताओं को हिरासत में ले लिया। उन पर कई गंभीर आरोप लगे हैं, जैसे दंगा भड़काना, सरकारी कर्मचारियों से झगड़ा करना, और सांप्रदायिक तनाव फैलाना।
इन सब घटनाओं को देखते हुए सरकार ने पूरे राज्य में सुरक्षा को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। मकसद साफ है – किसी भी तरह की हिंसा या आतंकी गतिविधि को रोकना और लोगों को सुरक्षित महसूस कराना। अब वर्दियों की बिक्री पर रोक, संदिग्धों की जांच और कानून का सख्त पालन ही सरकार की प्राथमिकता है।
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