चारधाम यात्रा को लेकर तैयारियाँ जोरों पर हैं। इस बार बड़ी संख्या में श्रद्धालु केदारनाथ धाम की यात्रा पर जा रहे हैं, इसलिए घोड़ा-खच्चरों की जरूरत भी काफी बढ़ गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में एक विशेष शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें 2500 से ज्यादा घोड़ा-खच्चरों का पंजीकरण किया गया।
यह शिविर बांसवाड़ा के घाटोल क्षेत्र में लगाया गया, जहाँ बड़ी संख्या में पशुपालक अपने घोड़ा-खच्चरों के साथ पहुँचे। यहाँ पर प्रशासन की ओर से घोड़ों का हेल्थ चेकअप किया गया, उनके दस्तावेज देखे गए और फिर उन्हें यात्रा के लिए अधिकृत किया गया। साथ ही पशुपालकों को यह भी बताया गया कि यात्रा के दौरान उन्हें किन-किन नियमों का पालन करना होगा और जानवरों की देखभाल कैसे करनी है।
पंजीकरण के बाद इन घोड़ा-खच्चरों को उत्तराखंड भेजा जाएगा, जहाँ ये केदारनाथ यात्रा पर आए तीर्थयात्रियों को चढ़ाई में मदद करेंगे। चारधाम यात्रा में खासतौर पर केदारनाथ धाम तक पहुँचने के लिए लोग पैदल रास्ते में घोड़ा-खच्चरों का सहारा लेते हैं, क्योंकि रास्ता कठिन और ऊँचाई वाला होता है।
इस तरह के शिविर यात्रियों की सुविधा और पशुओं की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी होते हैं। इससे न सिर्फ यात्रा में मदद मिलती है, बल्कि पशुपालकों को भी रोजगार का अवसर मिलता है।
चारधाम यात्रा 2025 के लिए यह एक अहम कदम माना जा रहा है, जिससे लाखों श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित और आरामदायक हो सकेगी।
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