उत्तराखंड में 27 जनवरी 2025 से समान नागरिक संहिता (UCC) लागू हो गई है, जिसके बाद से विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन में तेजी देखने को मिली है। इस कानून के तहत सभी धर्मों के लिए विवाह, तलाक और संपत्ति जैसे मामलों में समान नियम लागू किए गए हैं।
अब तक राज्य में 5,112 लोगों ने विवाह के लिए आवेदन किया है। हालांकि, लिव-इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन में उतनी तेजी नहीं आई है। सिर्फ सात जोड़े ही अब तक लिव-इन के तहत रजिस्टर हुए हैं। यह संख्या इस बात को दिखाती है कि लोग इस नए कानून को लेकर उतने उत्साहित नहीं हैं, और शायद कुछ सामाजिक या कानूनी चिंताओं के कारण वे इसे अपनाने में हिचकिचा रहे हैं।
यूसीसी के तहत, लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य किया गया है। अगर कोई जोड़ा एक महीने से ज्यादा समय तक लिव-इन में रहता है और रजिस्ट्रेशन नहीं कराता, तो उन्हें तीन महीने तक की सजा या 10,000 रुपये का जुर्माना हो सकता है।
सरकार का कहना है कि यह एक नया कानून है, और लोगों को इसे समझने और अपनाने में समय लग सकता है। इस प्रक्रिया को पूरी तरह से स्वीकार करने में लोगों को वक्त लगेगा, लेकिन सरकार इस दिशा में जागरूकता बढ़ाने के प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुद इस पोर्टल पर अपनी शादी का पहला रजिस्ट्रेशन किया था, ताकि लोग इसे अपनाने के लिए प्रेरित हो सकें। विवाह रजिस्ट्रेशन में तेजी आई है, लेकिन लिव-इन के रजिस्ट्रेशन के लिए अभी भी बहुत कम लोग सामने आए हैं।





