उत्तराखंड के 166 पुलिस थानों में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत कुल 996 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों की रिकॉर्डिंग क्षमता कम से कम एक वर्ष की है। राज्य और जिला स्तर पर निगरानी समितियां गठित की गई हैं, जो कैमरों की नियमित जांच और रखरखाव सुनिश्चित करेंगी।
थानों में निगरानी और जिम्मेदारी
प्रत्येक थाने में औसतन 6 कैमरे लगाए गए हैं, जिनमें ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा उपलब्ध है।
• थाना प्रभारी और नोडल अधिकारी प्रतिदिन सुबह 8 बजे कैमरों की रिकॉर्डिंग जांचेंगे।
• किसी भी प्रकार की खराबी या छेड़छाड़ की स्थिति में जिम्मेदारी सीधे थाना प्रभारी और नोडल अधिकारी की होगी।
• कैमरों की जांच, रात की रिकॉर्डिंग की समीक्षा और रजिस्टर में विवरण दर्ज करना अनिवार्य है।
जिलेवार कैमरों की संख्या
• अल्मोड़ा: 72
• बागेश्वर: 36
• चमोली: 60
• चम्पावत: 48
• देहरादून: 138
• हरिद्वार: 114
• नैनीताल: 96
• पौड़ी गढ़वाल: 84
• पिथौरागढ़: 96
• रुद्रप्रयाग: 30
• टिहरी गढ़वाल: 72
• उधमसिंह नगर: 108
• उत्तरकाशी: 42
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
यह कदम सुप्रीम कोर्ट के परमवीर सिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह मामले के आदेश का पालन है। 2020 में आया यह आदेश पुलिस थानों और जांच एजेंसियों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए दिया गया था।
• हर पुलिस स्टेशन, एनआईए, ईडी, एनसीबी आदि कार्यालयों में सीसीटीवी अनिवार्य होंगे।
• फुटेज कम से कम 6 महीने तक सुरक्षित रखी जाएगी।
• नागरिक मानवाधिकार हनन की शिकायत पर फुटेज संरक्षित करने का अनुरोध कर सकते हैं।
यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा और पुलिस कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
“उत्तराखंड के थानों में सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार 996 सीसीटीवी कैमरे, जानिए कैसे होगी निगरानी”
On: November 1, 2025 8:32 AM





