नई दिल्ली/गुवाहाटी: देशभर के सरकारी कर्मचारियों के लिए आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। जहाँ एक ओर केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारी और पेंशनभोगी अगले वेतन आयोग के गठन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, वहीं असम की भाजपा सरकार ने बाजी मारते हुए राज्य में ‘आठवां असम वेतन आयोग 2026’ गठित करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। असम ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।
असम सरकार का बड़ा कदम: कौन करेगा अगुवाई?
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में वित्त विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं। नए आयोग की कमान पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव सुभाष चंद्र दास को सौंपी गई है। इस उच्च स्तरीय समिति में उनके साथ सात अन्य विशेषज्ञों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। यह आयोग न केवल वेतन वृद्धि पर काम करेगा, बल्कि राज्य की प्रशासनिक क्षमता और वित्तीय स्थिरता को बेहतर बनाने के लिए भी रोडमैप तैयार करेगा।
18 महीने में आएगी रिपोर्ट, 10 साल का इंतजार होगा खत्म
राज्य सरकार के नोटिफिकेशन के मुताबिक, आयोग को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। गौरतलब है कि असम में पिछला वेतन संशोधन 1 अप्रैल 2016 को लागू हुआ था, जो सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों पर आधारित था। अब ठीक दस साल बाद, 2026 में नए वेतन ढांचे को लागू करने की तैयारी है।
इस आयोग का उद्देश्य केवल वेतन बढ़ाना नहीं है, बल्कि ‘नतीजों पर आधारित प्रशासन’ (Outcome-based Governance) और नई तकनीकों के समावेश के जरिए सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाना भी है।
इन कर्मचारियों को नहीं मिलेगा लाभ
आयोग ने स्पष्ट किया है कि कुछ विशेष श्रेणियों के अधिकारी इसके दायरे से बाहर रहेंगे:
- अखिल भारतीय सेवा (AIS) के अधिकारी।
- यूजीसी (UGC) या एआईसीटीई (AICTE) वेतनमान वाले शैक्षणिक संस्थानों के पद।
- राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग (शेट्टी आयोग) के तहत आने वाले न्यायिक अधिकारी।
हालांकि, राज्य के लाखों पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों के लिए यह राहत भरी खबर है, क्योंकि आयोग उनके लिए महंगाई राहत (DR) और पेंशन संशोधन पर भी नई सिफारिशें देगा।
यूपी, बिहार और अन्य राज्यों की क्या है स्थिति?
असम के इस कदम के बाद अब उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे बड़े राज्यों में भी हलचल तेज हो गई है। आमतौर पर राज्य सरकारें अपना वेतन आयोग तब गठित करती हैं जब केंद्र सरकार इसकी घोषणा कर देती है। - उत्तर प्रदेश: यूपी में कर्मचारियों का संगठन लगातार आठवें वेतन आयोग की मांग कर रहा है। माना जा रहा है कि यदि केंद्र 2025 के मध्य तक घोषणा करता है, तो यूपी सरकार भी चुनाव से पहले या उसके तुरंत बाद अपना आयोग बना सकती है।
- बिहार: बिहार में भी फिटमेंट फैक्टर और वेतन विसंगतियों को लेकर मांग उठती रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यों में वेतन वृद्धि तभी प्रभावी रूप से लागू होगी जब केंद्रीय आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें सार्वजनिक हो जाएंगी।
क्या राज्यों में भी केंद्र जितना ही पैसा बढ़ता है?
एक बड़ा सवाल यह रहता है कि क्या राज्य कर्मचारियों की सैलरी भी केंद्र के बराबर बढ़ती है? ऑल इंडिया एनपीएस इम्प्लॉई फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल के अनुसार, भले ही राज्यों के अपने अलग आयोग हों (जैसे केरल में 11वां और पंजाब में 6वां चल रहा है), लेकिन पे-स्ट्रक्चर और फिटमेंट फैक्टर लगभग समान ही रहता है।
सातवें वेतन आयोग में केंद्र का फिटमेंट फैक्टर 2.57 था, जिसे उत्तर प्रदेश ने भी उसी रूप में अपनाया, जबकि पंजाब ने इसे 2.59 रखा था।
निष्कर्ष: कब से बढ़कर आएगी सैलरी?
असम के कर्मचारियों के लिए उम्मीद की किरण जाग गई है, लेकिन वास्तविक रूप में बढ़ा हुआ वेतन 2026 के मध्य या अंत तक ही मिलने की संभावना है। केंद्र सरकार के रुख पर नजर डालें तो आठवें वेतन आयोग के लागू होने की संभावित तारीख 1 जनवरी 2026 मानी जा रही है। यदि केंद्र इस पर मुहर लगाता है, तो असम सहित अन्य राज्य भी इसी तिथि से एरियर के साथ लाभ दे सकते हैं।
मुख्य हाइलाइट्स
| विवरण | जानकारी |
| :— | :— |
| राज्य | असम (पहला राज्य) |
| आयोग के अध्यक्ष | सुभाष चंद्र दास |
| समय सीमा | 18 महीने |
| संभावित लागू तिथि | 1 जनवरी 2026 |
| प्रमुख लक्ष्य | वेतन वृद्धि + प्रशासनिक सुधार |






