भाजपा राज के अंतिम दौर में राज्य में विभिन्न संवैधानिक पदों पर की गई नियुक्तियों में मानकों की अनदेखी किए जाने के मामले सामने आ रहे हैं. सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारियां होश उड़ा देने वाली है. ऐसे में समझा जा सकता है कि प्रदेश सरकार अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए किसी भी हद तक गुजर सकती है. एक ऐसा ही कारनामा रुद्रप्रयाग जनपद में भी किया गया है, जिसका खुलासा आरटीआई में जानकारी मांगने के बाद हुआ है.
आरटीआई एक्टिविस्ट श्याम लाल सुंदरियाल ने बताया कि निदेशालय महिला कल्याण विभाग से जिला बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष एवं सदस्य पद के लिए अभ्यर्थियों के आवेदन की सूची सूचना अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई थी.
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इसके अलावा चयनित जिला बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष व उनके समस्त दस्तावेजों के साथ ही शैक्षणिक योग्यता एवं अर्हता से जुड़े प्रमाण पत्र की भी जानकारी मांगी गई थी. लेकिन जो जानकारी निदेशालय से प्राप्त हुई, वह हैरात करने वाली है.
उन्होंने बताया कि सूचना का अधिकार अधिनिनियम के तहत मिली जानकारी के मुताबिक, जिस व्यक्ति ने बाल कल्याण समिति के सदस्य पद के लिए आवेदन किया था. उस व्यक्ति को बाल कल्याण समिति का अध्यक्ष बना दिया गया है. जबकि यह व्यक्ति शैक्षणिक योग्यता के साथ ही अनुभवविहिन है. अनुभव के आधार पर यह नियुक्ति मिल पाना असंभव है. बावजूद इसके इस पद में बड़ा खेल करके उक्त व्यक्ति को अध्यक्ष पद पर चयनित किया गया, जो सरासर गलत है. इसकी जांच होनी आवश्यक है.










