अल्मोड़ा बागेश्वर चमोली चम्पावत देहरादून हरिद्वार नैनीताल पौड़ी गढ़वाल पिथौरागढ़ रुद्रप्रयाग टिहरी गढ़वाल उधम सिंह नगर उत्तरकाशी

उत्तराखंड में एमएसएमई सेक्टर को नई रफ्तार, मिनी औद्योगिक आस्थानों में 5% प्लॉट और शेड आरक्षित

On: August 14, 2025 8:21 AM
Follow Us:

उत्तराखंड सरकार ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के सर्विस सेक्टर को नई ऊर्जा देने के लिए एक बड़ा और दूरगामी फैसला लिया है। राज्य कैबिनेट की बैठक में बुधवार को यह निर्णय लिया गया कि राज्य के सभी मिनी औद्योगिक आस्थानों में सर्विस सेक्टर के लिए 5 प्रतिशत प्लॉट और शेड आरक्षित किए जाएंगे। इस कदम से स्थानीय उद्यमियों को नए अवसर मिलेंगे, औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आएगी और राज्य के रोजगार परिदृश्य में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।

रोजगार और निवेश को नई दिशा

फिलहाल उत्तराखंड में 89,877 से अधिक एमएसएमई इकाइयां सक्रिय हैं, जिनमें लगभग 17,189.37 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है और 4,45,492 लोगों को रोजगार मिला हुआ है। सरकार का मानना है कि यह नया प्रावधान न केवल मौजूदा उद्योगों की क्षमता बढ़ाएगा बल्कि छोटे और नए उद्यमियों को भी औद्योगिक परिदृश्य में मजबूत स्थान दिलाएगा।

पलायन रोकने और संतुलित विकास की कोशिश

राज्य के नौ पूर्णतः पहाड़ी जिलों में लंबे समय से उद्योग लगाने की इच्छा तो रही है, लेकिन भूमि की कमी सबसे बड़ी बाधा रही है। इस नई नीति के तहत आरक्षित प्लॉट और शेड, खासकर छोटे उद्यमियों के लिए, एक सुनहरा अवसर बनेंगे। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित होगा और पलायन की समस्या पर अंकुश लगेगा, क्योंकि लोग अपने ही जिले में रोजगार और कारोबार कर सकेंगे।

पहाड़ी क्षेत्रों में उद्योगों की अपार संभावनाएं

उत्तराखंड के भूगोल को देखते हुए, फार्मास्युटिकल, टिंबर, कागज उद्योग और फूड प्रोसेसिंग यूनिट जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं हैं। चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, चंपावत, अल्मोड़ा और बागेश्वर जैसे जिले स्थानीय संसाधनों के आधार पर उद्योग विकसित करने के लिए आदर्श माने जाते हैं। इससे न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी बल्कि युवाओं को घर के पास ही आजीविका के साधन उपलब्ध होंगे।

राज्य की औद्योगिक संरचना होगी और मजबूत

उद्योग जगत का मानना है कि इस नीति से न केवल स्थानीय उद्यमियों को बढ़ावा मिलेगा बल्कि बाहरी निवेशक भी उत्तराखंड में निवेश के लिए आकर्षित होंगे। इसके परिणामस्वरूप औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि, सर्विस सेक्टर में प्रतिस्पर्धा और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। नीति निर्माता इसे समावेशी और संतुलित औद्योगिक विकास की दिशा में एक अहम कदम मानते हैं, जिससे मैदानी क्षेत्रों के साथ-साथ पहाड़ी जिलों में भी औद्योगिक माहौल बनेगा।

यह भी पढें- उत्तराखंड कैबिनेट का बड़ा फैसला: स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा विभाग में आउटसोर्सिंग से होगी भर्ती

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment