Pauri Leopard Attack 2026 की एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर कर रख दिया है। पौड़ी जिले के वजली गांव में शाम के वक्त अपने घर के आंगन में खेल रही पांच साल की मासूम बच्ची आरुषि को एक खूंखार गुलदार परिजनों की नजरों के सामने ही उठाकर ले गया। इस दर्दनाक हादसे में मासूम की मौत हो गई। घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में मातम पसर गया है और स्थानीय लोगों का गुस्सा शासन-प्रशासन के खिलाफ फूट पड़ा है।
Pauri Leopard Attack 2026: आंगन में खेल रही मासूम को झपट्टा मारकर ले गया गुलदार
पौड़ी गढ़वाल वन प्रभाग के अंतर्गत नागदेव रेंज में स्थित वजली गांव में शाम करीब सवा छह बजे यह दुखद हादसा हुआ। कृष्ण कुमार और बबीता देवी की पांच वर्षीय लाडली आरुषि घर के आंगन में खेल रही थी। तभी अचानक झाड़ियों से निकलकर आए गुलदार ने मासूम पर हमला कर दिया।
परिजनों के चीखने-चिल्लाने पर ग्रामीणों ने तुरंत गुलदार का पीछा किया। कुछ दूरी पर ग्रामीणों के आने की आहट सुनकर गुलदार मासूम को झाड़ियों में छोड़कर भाग निकला, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बच्ची ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था। इस horrific Pauri Leopard Attack 2026 की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र में शोक और दहशत का माहौल बन गया।
Pauri Leopard Attack 2026 के बाद फूटा जनाक्रोश, विधायक की गाड़ी का घेराव
घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा चरम पर पहुंच गया। खांड्यूसैंण इलाके में सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण सड़कों पर उतर आए। स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब सांत्वना देने पहुंचे क्षेत्रीय विधायक राजकुमार पोरी के वाहन को उग्र भीड़ ने चारों तरफ से घेर लिया।
हादसे की मुख्य झलकियां:
- मासूम की पहचान: 5 वर्षीय आरुषि (ननिहाल आई हुई थी)।
- स्थान: वजली गांव, नागदेव रेंज, पौड़ी गढ़वाल।
- जनता की मांग: गुलदार को तुरंत आदमखोर घोषित कर ढेर किया जाए।
- प्रदर्शन: विधायक की गाड़ी का घेराव, बानेट पर चढ़कर बुजुर्ग महिला ने दर्ज कराया विरोध।
विरोध प्रदर्शन इतना तीव्र था कि विधायक अपनी गाड़ी से बाहर नहीं आ सके। इसी दौरान एक बुजुर्ग महिला (मासूम की रिश्ते में दादी) व्यवस्था के प्रति अपने आक्रोश को व्यक्त करते हुए सीधे विधायक की गाड़ी के बोनट पर चढ़ गई। ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधि केवल हादसों के बाद सांत्वना देने आते हैं, जबकि सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते।
ननिहाल आई थी मासूम आरुषि, परिवार में छाया मातम
मृतक बच्ची आरुषि मूल रूप से खांड ब्लॉक के मल्ली गांव की रहने वाली थी। वह कुछ महीने पहले ही अपनी मां बबीता के साथ वजली गांव स्थित अपने ननिहाल आई हुई थी। पिता कृष्ण कुमार मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। इस त्रासदी के बाद बच्ची के पिता और मां का रो-रोकर बुरा हाल है। Pauri Leopard Attack 2026 ने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां पल भर में छीन लीं।
वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि पौड़ी के गांवों में गुलदार का आतंक लगातार बढ़ रहा है, लेकिन वन विभाग और सरकार आंखें मूंदे बैठी हैं। ‘वन मंत्री पौड़ी आओ’ के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया कि जब लगातार मासूम बच्चों और बुजुर्गों पर हमले हो रहे हैं, तब जिम्मेदार अधिकारी और मंत्री धरातल पर क्यों नहीं दिखते?
गढ़वाल डीएफओ महातिम यादव ने बताया कि घटना की जानकारी उच्च अधिकारियों को दे दी गई है और वन विभाग की टीम मौके पर गश्त कर रही है। गुलदार को आदमखोर घोषित करने के लिए मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को पत्र भेज दिया गया है।
कब मिलेगी मौत के खौफ से मुक्ति?
पहाड़ी क्षेत्रों में गुलदार की बढ़ती सक्रियता के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है। शाम ढलते ही गांवों में सन्नाटा पसर जाता है। लोग अपने बच्चों को अकेले बाहर भेजने से डर रहे हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि अब केवल औपचारिक आश्वासनों से काम नहीं चलेगा; उन्हें सुरक्षा की ठोस गारंटी चाहिए।
आगे क्या?
क्षेत्रीय जनता ने मांग की है कि संवेदनशील गांवों में वन विभाग की क्विक रिस्पांस टीम (QRT) तैनात की जाए, नियमित गश्त बढ़ाई जाए और मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए ठोस नीति बनाई जाए।
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