देहरादून, 3 नवंबर 2026: उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका से जुड़े दावों की जांच को लेकर मंगलवार को भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। देहरादून की सीबीआई कोर्ट में पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर और अभिनेत्री उर्मिला सनावर की पेशी निर्धारित थी, लेकिन दोनों अदालत में उपस्थित नहीं हुए। इसके चलते नार्को टेस्ट से संबंधित प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
अदालत में दोनों की पूर्व सहमति को लेकर स्थिति स्पष्ट होनी थी। अब इस मामले में सुनवाई के लिए नई तारीख निर्धारित की जाएगी।
इस बीच उर्मिला सनावर से जुड़े एक अन्य आपराधिक मामले में भी घटनाक्रम तेजी से बदला है। पूर्व विधायक सुरेश राठौर की बेटी दीपिका राठौर की शिकायत पर दर्ज पांच करोड़ रुपये की कथित रंगदारी के मामले में उर्मिला को सोमवार, 2 नवंबर को जमानत मिल गई थी।
हालांकि, जमानत मिलने और जेल से वास्तविक रिहाई होने के बीच आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।
CBI Court Dehradun: तीसरी नवंबर की सुनवाई क्यों टली?
देहरादून स्थित सीबीआई कोर्ट में मंगलवार, 3 नवंबर को सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर की पेशी होनी थी।
अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका से जुड़े दावों की जांच के सिलसिले में दोनों के नार्को टेस्ट पर विचार किया जा रहा है।
अदालत को उनकी सहमति की स्थिति स्पष्ट करनी थी, लेकिन निर्धारित तारीख पर दोनों उपस्थित नहीं हुए।
इस कारण नार्को टेस्ट से संबंधित अगली कानूनी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
अब अदालत मामले में नई सुनवाई की तारीख निर्धारित करेगी।
फिलहाल अगली तारीख की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
26 अक्टूबर को भी नहीं हो सकी थी सुनवाई
यह पहली बार नहीं है जब इस मामले में दोनों की गैरमौजूदगी के कारण सुनवाई प्रभावित हुई है।
इससे पहले सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को भी सीबीआई कोर्ट में नार्को टेस्ट संबंधी सुनवाई होनी थी।
उस दिन पूर्व विधायक सुरेश राठौर अदालत में उपस्थित नहीं हुए थे।
उन्होंने लिखित सूचना भेजकर खराब स्वास्थ्य के कारण पेश नहीं हो पाने की जानकारी दी थी।
वहीं, उर्मिला सनावर एक अन्य मामले में हरिद्वार पुलिस की ओर से गिरफ्तार किए जाने के बाद न्यायिक हिरासत में थीं।
दोनों की गैरहाजिरी के कारण अदालत ने उस दिन सुनवाई स्थगित करते हुए तीन नवंबर की तारीख तय की थी।
लेकिन मंगलवार को भी दोनों उपस्थित नहीं हुए, जिसके बाद मामले में नई तारीख तय करने की स्थिति बन गई।
Ankita Bhandari Murder Case में नार्को टेस्ट क्यों चर्चा में है?
अंकिता भंडारी हत्याकांड उत्तराखंड के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल रहा है।
वर्ष 2022 में पौड़ी गढ़वाल जिले के यमकेश्वर क्षेत्र में स्थित एक रिसॉर्ट में कार्यरत अंकिता भंडारी की हत्या ने प्रदेश में व्यापक विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया था।
इस मामले में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर विभिन्न दावे और सवाल उठते रहे हैं।
पूर्व विधायक सुरेश राठौर और अभिनेत्री उर्मिला सनावर से जुड़े कुछ सार्वजनिक बयानों तथा ऑडियो रिकॉर्डिंग के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आया।
इन दावों की सत्यता की जांच के संदर्भ में नार्को टेस्ट की प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
हालांकि, कथित वीआईपी से संबंधित आरोपों को न्यायिक रूप से स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
किसी व्यक्ति के विरुद्ध आपराधिक जिम्मेदारी तय करने के लिए स्वतंत्र साक्ष्य और विधिक प्रक्रिया आवश्यक है।
पहले दोनों ने नार्को टेस्ट के लिए जताई थी सहमति
अक्टूबर 2026 में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर ने नार्को टेस्ट कराने के लिए सहमति जताई थी।
23 अक्टूबर को दोनों अदालत के समक्ष उपस्थित हुए थे।
इसके बाद अदालत ने उन्हें अपनी सहमति पर दोबारा विचार करने का अवसर दिया और अगली पेशी के लिए निर्देशित किया।
नार्को टेस्ट से संबंधित प्रक्रिया में व्यक्ति की स्वैच्छिक सहमति और न्यायिक निगरानी महत्वपूर्ण होती है।
इसी कारण अदालत दोनों की सहमति की स्थिति स्पष्ट करना चाहती है।
26 अक्टूबर और फिर तीन नवंबर को पेशी नहीं होने से यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
अब अगली सुनवाई में दोनों की उपस्थिति और नार्को टेस्ट को लेकर उनके रुख पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
Narco Test क्या होता है और इसके लिए सहमति क्यों जरूरी है?
नार्को एनालिसिस एक जांच संबंधी प्रक्रिया है, जिसमें विशेष दवा के प्रभाव के दौरान व्यक्ति से सवाल पूछे जाते हैं।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य जांच से जुड़ी संभावित जानकारी प्राप्त करना होता है।
हालांकि, नार्को टेस्ट को सच और झूठ का पूरी तरह विश्वसनीय वैज्ञानिक परीक्षण नहीं माना जाता।
भारत में इस प्रकार के परीक्षणों से संबंधित महत्वपूर्ण संवैधानिक और कानूनी शर्तें लागू होती हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने Selvi बनाम कर्नाटक राज्य (2010) मामले में स्पष्ट किया था कि किसी व्यक्ति का नार्को एनालिसिस, पॉलीग्राफ या ब्रेन मैपिंग परीक्षण जबरन नहीं कराया जा सकता।
ऐसे परीक्षणों के लिए स्वैच्छिक सहमति और निर्धारित सुरक्षा उपाय आवश्यक हैं।
इसके अतिरिक्त परीक्षण के दौरान दिए गए कथन को अपने आप में अपराध सिद्ध करने वाला स्वीकार्य साक्ष्य नहीं माना जाता।
इसलिए नार्को टेस्ट की अनुमति मिलना, परीक्षण होना और उससे किसी आरोप का सिद्ध होना तीन अलग-अलग कानूनी अवस्थाएं हैं।
उर्मिला सनावर को दो नवंबर को मिली जमानत
सीबीआई कोर्ट की कार्यवाही से अलग उर्मिला सनावर के खिलाफ हरिद्वार में दर्ज कथित रंगदारी के मामले में सोमवार, 2 नवंबर को महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया।
हरिद्वार की अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने उनकी जमानत अर्जी स्वीकार कर ली।
रिपोर्टों के अनुसार, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अविनाश कुमार श्रीवास्तव ने ₹50 हजार का व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही राशि के दो जमानती प्रस्तुत करने की शर्त पर रिहाई का आदेश दिया।
इससे उर्मिला सनावर को संबंधित मामले में न्यायिक राहत मिली।
हालांकि, आदेश के बाद जमानती दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी करना आवश्यक था।
मंगलवार को उनकी रिहाई की संभावना जताई गई थी, लेकिन अन्य कानूनी मामलों के कारण तत्काल रिहाई की स्थिति स्पष्ट नहीं थी।
दीपिका राठौर ने लगाया था पांच करोड़ रुपये की रंगदारी का आरोप
पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर की बेटी दीपिका राठौर ने 24 अक्टूबर 2026 को हरिद्वार की रानीपुर कोतवाली में उर्मिला सनावर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उर्मिला सनावर की ओर से पांच करोड़ रुपये की मांग की गई।
इसके अतिरिक्त रविदास धाम को अपने नाम कराने के लिए दबाव बनाए जाने का भी आरोप लगाया गया था।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
यहां यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि पांच करोड़ रुपये की कथित रंगदारी और संपत्ति संबंधी दबाव के दावे शिकायतकर्ता के आरोप हैं।
इन आरोपों को अदालत द्वारा सिद्ध अपराध के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
जमानत मिलने का अर्थ भी आरोपों से दोषमुक्त होना नहीं है।
25 अक्टूबर को सहारनपुर से हुई थी गिरफ्तारी
दीपिका राठौर की शिकायत के बाद हरिद्वार पुलिस ने 25 अक्टूबर को उर्मिला सनावर को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया था।
गिरफ्तारी के बाद उन्हें संबंधित न्यायालय के समक्ष पेश किया गया।
अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
इसके बाद उनकी ओर से जमानत याचिका दाखिल की गई।
शुरुआती तारीखों पर जांच आख्या उपलब्ध नहीं होने और अन्य प्रक्रियात्मक कारणों से जमानत पर सुनवाई आगे नहीं बढ़ सकी।
आखिरकार दो नवंबर को अदालत ने जमानत अर्जी स्वीकार कर ली।
इस बीच उनकी हिरासत का प्रभाव देहरादून सीबीआई कोर्ट में निर्धारित पेशी पर भी पड़ा था।
जमानत मिलने के बावजूद रिहाई में क्यों आ सकती है देरी?
किसी आरोपी को जमानत मिलने के बाद अदालत की ओर से निर्धारित शर्तें पूरी करनी होती हैं।
इनमें व्यक्तिगत बंधपत्र और जमानती प्रस्तुत करना शामिल हो सकता है।
उर्मिला सनावर के मामले में भी अदालत ने निर्धारित धनराशि के बंधपत्र और जमानतियों की शर्त रखी थी।
तीन नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, जमानती दस्तावेज पूरे नहीं होने के कारण सोमवार रात तक वह जेल में थीं।
इसके अतिरिक्त देहरादून में दर्ज एक अन्य मामले से संबंधित संभावित कानूनी कार्रवाई की भी चर्चा सामने आई।
हालांकि, किसी दूसरे मामले में रिमांड या गिरफ्तारी की संभावना को वास्तविक कार्रवाई मानना उचित नहीं होगा।
उनकी रिहाई की अंतिम स्थिति संबंधित जेल और न्यायालय के रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगी।
सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर के बयानों की जांच क्यों महत्वपूर्ण?
अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर सामने आए दावों ने राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर सवाल खड़े किए हैं।
सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर के नाम इस विवाद से जुड़े सार्वजनिक बयानों के संदर्भ में चर्चा में आए।
जांच एजेंसियों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि इन दावों का आधार क्या है और क्या इनके समर्थन में स्वतंत्र साक्ष्य उपलब्ध हैं।
किसी सार्वजनिक बयान या वायरल ऑडियो को बिना सत्यापन के निर्णायक साक्ष्य नहीं माना जा सकता।
ऑडियो की प्रामाणिकता, संबंधित व्यक्तियों के बयान और अन्य दस्तावेज जांच के दौरान महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
नार्को टेस्ट की संभावित प्रक्रिया भी इस व्यापक जांच से संबंधित है।
लेकिन जांच का अंतिम निष्कर्ष परीक्षण के परिणाम मात्र से नहीं, बल्कि विधिसम्मत साक्ष्यों के समग्र मूल्यांकन से निर्धारित होगा।
अब अगली सुनवाई में क्या हो सकता है?
तीन नवंबर को दोनों के अदालत में पेश नहीं होने के बाद मामला नई सुनवाई की तारीख का इंतजार कर रहा है।
अगली तारीख पर अदालत दोनों की उपस्थिति और नार्को टेस्ट के संबंध में उनकी स्वैच्छिक सहमति की स्थिति पर विचार कर सकती है।
यदि परीक्षण के लिए आवश्यक कानूनी शर्तें पूरी होती हैं, तो संबंधित प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर निर्णय लिया जा सकता है।
हालांकि, परीक्षण की तारीख, संबंधित एजेंसी की आगे की कार्रवाई या अदालत के संभावित आदेश के बारे में अभी कोई निश्चित जानकारी नहीं है।
इसके अतिरिक्त उर्मिला सनावर के विरुद्ध दर्ज अन्य मामले की न्यायिक प्रक्रिया अलग से आगे बढ़ेगी।
इसलिए दोनों मामलों की सुनवाई और कानूनी परिणामों को एक-दूसरे के समान नहीं समझना चाहिए।
Suresh Rathore Urmila Sanawar Court Hearing: क्या है ताजा स्थिति?
देहरादून की सीबीआई कोर्ट में मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को पूर्व विधायक सुरेश राठौर और अभिनेत्री उर्मिला सनावर की पेशी नहीं हो सकी।
दोनों की गैरहाजिरी के कारण अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी से जुड़े दावों की जांच के सिलसिले में प्रस्तावित नार्को टेस्ट की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।
अब अदालत नई सुनवाई की तारीख निर्धारित करेगी।
दूसरी ओर, उर्मिला सनावर को दीपिका राठौर की शिकायत पर दर्ज कथित रंगदारी के मामले में दो नवंबर को जमानत मिल चुकी है, लेकिन उनकी वास्तविक रिहाई की स्थिति अलग कानूनी प्रक्रियाओं पर निर्भर है।
अब अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर नार्को टेस्ट के लिए अपनी पूर्व सहमति पर कायम रहते हैं या नहीं।