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उत्तराखंड: सरकार का बड़ा फैसला, कमर्शियल LPG के लिए SOP जारी; अब हर दिन मिलेंगे 2650 सिलेंडर

On: March 17, 2026 6:47 AM
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उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के दौरान कमर्शियल गैस सिलेंडर वितरण और आपूर्ति के लिए सरकारी ट्रक और वर्कर।

देहरादून: उत्तराखंड में आगामी चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन को देखते हुए धामी सरकार ने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बड़ी राहत दी है। प्रदेश में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की किल्लत और पर्यटन व्यवसायियों की चिंताओं को देखते हुए खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने एक विस्तृत SOP (Standard Operating Procedure) जारी की है। इस नई व्यवस्था के तहत अब प्रदेश में प्रतिदिन 2650 कमर्शियल गैस सिलेंडर वितरित किए जाएंगे।

सचिव आनंद स्वरूप द्वारा जारी इस आदेश का मुख्य उद्देश्य पर्यटन सत्र के दौरान गैस आपूर्ति को सुचारू बनाना है, ताकि राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पर्यटन उद्योग पर कोई आंच न आए।

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क्यों पड़ी SOP की जरूरत?

स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ

वर्तमान में उत्तराखंड में शीतकालीन यात्रा चल रही है और अगले महीने से विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा का आगाज होने जा रहा है। ऐसे में होटल, ढाबा और रेस्टोरेंट संचालकों ने आशंका जताई थी कि कमर्शियल गैस की कमी के कारण उनके व्यवसाय पर बुरा असर पड़ सकता है। यदि समय रहते आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई, तो यह राज्य के आर्थिक हितों के प्रतिकूल हो सकता था।

इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य स्तरीय समिति और जिलाधिकारियों की बैठक के बाद, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MP&NG) के दिशा-निर्देशों के आधार पर यह ठोस योजना तैयार की गई है।

तेल कंपनियों को मिली जिम्मेदारी, जिलाधिकारियों को दी जाएगी रिपोर्ट

नई SOP के अनुसार, भारत की तीन प्रमुख तेल एवं गैस आपूर्तिकर्ता कंपनियां— IOCL (इंडियन ऑयल), BPCL (भारत पेट्रोलियम) और HPCL (हिंदुस्तान पेट्रोलियम) — अपनी वर्तमान बाजार हिस्सेदारी (Market Share) के अनुसार सिलेंडरों की आपूर्ति करेंगी।

विशेष निर्देश: ये कंपनियां न केवल गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करेंगी, बल्कि इसकी दैनिक और साप्ताहिक जानकारी संबंधित जिले के जिलाधिकारी (DM) को भी उपलब्ध कराएंगी, ताकि वितरण में पारदर्शिता बनी रहे और कालाबाजारी पर रोक लग सके।

सेक्टर-वार आवंटन: किसे कितना मिलेगा लाभ?

सरकार ने विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों की महत्ता को देखते हुए सिलेंडरों का कोटा निर्धारित किया है। प्रतिदिन वितरित होने वाले 2650 सिलेंडरों का वर्गीकरण इस प्रकार है:

सेक्टर (व्यवसाय का प्रकार)प्रतिदिन आवंटित सिलेंडर
रेस्टोरेंट एवं ढाबा1000 सिलेंडर
होटल एवं रिजॉर्ट750 सिलेंडर
फार्मास्यूटिकल (जीवन रक्षक दवा कंपनियां)190 सिलेंडर
सरकारी गेस्ट हाउस (सरकारी नियंत्रण वाले)150 सिलेंडर
औद्योगिक कैंटीन150 सिलेंडर
पेइंग गेस्ट (PG) आवास150 सिलेंडर
डेयरी एवं खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां130 सिलेंडर
होम स्टे एवं स्वयं सहायता समूह (SHG)130 सिलेंडर

जिलेवार वितरण का गणित: देहरादून को सबसे ज्यादा हिस्सा

गैस सिलेंडरों का वितरण जिलों में मौजूद व्यावसायिक कनेक्शनों की संख्या के आधार पर किया जाएगा। इसमें राजधानी देहरादून को सबसे अधिक कोटा मिला है।

  • देहरादून: 31%
  • हरिद्वार एवं नैनीताल: 13% – 13%
  • ऊधमसिंह नगर: 9%
  • चमोली: 6%
  • रुद्रप्रयाग: 5%
  • पौड़ी, उत्तरकाशी, टिहरी और अल्मोड़ा: 4% – 4% प्रत्येक
  • पिथौरागढ़: 3%
  • बागेश्वर एवं चम्पावत: 2% – 2% प्रत्येक

पर्यटन और अर्थव्यवस्था पर असर

उत्तराखंड की जीडीपी में पर्यटन का बहुत बड़ा योगदान है। चारधाम यात्रा के दौरान लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं। होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर में गैस की कमी न केवल सेवाओं को बाधित करती है, बल्कि इससे महंगाई भी बढ़ती है। सरकार के इस कदम से होम-स्टे और छोटे स्वयं सहायता समूहों को भी मजबूती मिलेगी, जो दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा दे रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस SOP से गैस की कालाबाजारी पर लगाम लगेगी और वास्तविक कनेक्शन धारकों को समय पर सिलेंडर मिल सकेंगे। साथ ही, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों की मांग का 20 प्रतिशत तक अतिरिक्त कोटा सुरक्षित रखने का निर्णय भी सराहनीय है।

यह भी पढ़ें-मोतिहारी में पुलिस और अपराधियों के बीच भीषण मुठभेड़: दो कुख्यात बदमाश ढेर, STF का एक जवान वीरगति को प्राप्त

निष्कर्ष

उत्तराखंड सरकार द्वारा समय रहते उठाई गई यह पहल चारधाम यात्रा की तैयारियों को पुख्ता करती है। तेल कंपनियों और जिला प्रशासन के बीच समन्वय से न केवल व्यापारियों को राहत मिलेगी, बल्कि प्रदेश में आने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को भी बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

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