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उत्तराखंड में रिकवरी एजेंटों का दबंग रवैया, सड़क पर जबरन उठा रहे वाहन; प्रशासन सख्त

On: August 30, 2025 9:12 AM
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उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में बैंकों और फाइनेंस कंपनियों के रिकवरी एजेंटों की मनमानी पर जिला प्रशासन ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जिलाधिकारी सविन बंसल ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का उल्लंघन करने वाली एजेंसियों पर पुलिस और परिवहन विभाग को कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अवैध यार्डों में खड़े किए गए जब्त वाहनों की भी जांच की जाएगी।

दबंगई से उठाई जा रही गाड़ियां

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पिछले दिनों कई वाहन मालिकों ने शिकायत की कि रिकवरी एजेंट सड़कों पर गुंडागर्दी करते हुए लोगों से जबरन गाड़ियां छीन रहे हैं। कई मामलों में ये एजेंट पहले फोन कर धमकी देते हैं और उसके बाद मौके पर दबंगई दिखाकर गाड़ी उठाते हैं। जबकि सुप्रीम कोर्ट और आरबीआई ने लोन डिफॉल्ट की स्थिति में गाड़ी जब्त करने की एक स्पष्ट और वैधानिक प्रक्रिया तय कर रखी है।

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अवैध यार्ड बने वाहन खड़ा करने का अड्डा

जबरन उठाए गए वाहनों को रिकवरी एजेंसियां शहर के अलग-अलग यार्डों में खड़ा करती हैं। सूत्रों के अनुसार, इनमें से कई यार्ड पूरी तरह अवैध तरीके से संचालित हो रहे हैं। आईएसबीटी फ्लाईओवर, हरिद्वार बाईपास, रायवाला, ऋषिकेश और सिंघनीवाला में ऐसे स्थान मौजूद हैं, जहां बाइक से लेकर ट्रक और बस तक रखी जाती हैं। हल्द्वानी में हाल ही में ऐसे यार्डों पर छापा पड़ चुका है, जिसके बाद अब देहरादून भी प्रशासन की रडार पर है।

मध्यम वर्गीय परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित

वाहन खरीदने के लिए अधिकांश लोग बैंक या फाइनेंस कंपनियों से लोन लेते हैं। खासतौर पर मध्यम वर्गीय परिवार किस्तों में ही कार या बाइक खरीद पाते हैं। लेकिन किश्त चूक जाने पर यही बैंक और फाइनेंस कंपनियां ग्राहकों को परेशान करने लगती हैं। नतीजतन, आम लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

किश्त न चुकाने पर लागू गाइडलाइन

सुप्रीम कोर्ट और आरबीआई की गाइडलाइन के अनुसार:

पहली किश्त न भरने पर: ग्राहक को नोटिस और समय देकर जुर्माने सहित भुगतान का मौका दिया जाता है।

दो किश्तें चूकने पर: बैंक प्रतिनिधि ग्राहक से फोन या घर जाकर संपर्क कर सकते हैं।

तीन किश्तें न भरने पर: बैंक को गाड़ी जब्त करने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए पुलिस थाने में सूचना देना और वैधानिक प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है।

गाड़ी सरेंडर और नीलामी: वाहन सरेंडर होने के बाद मालिक को 15–30 दिन का समय मिलता है। इस अवधि में किश्त चुकाने पर वाहन वापस मिल सकता है। अगर रकम न चुकाई जाए तो गाड़ी नीलाम की जा सकती है और बची हुई राशि वाहन स्वामी को लौटाना अनिवार्य है।

नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई

जिलाधिकारी ने साफ कहा है कि यदि कोई रिकवरी एजेंसी सड़क पर वाहन छीनने या दबाव बनाने की कोशिश करती है तो यह गैरकानूनी है। ऐसे मामलों में वाहन स्वामी पुलिस को कॉल कर सकते हैं और एजेंसी के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है। फिलहाल, परिवहन विभाग और पुलिस ने सभी रिकवरी एजेंसियों की जांच शुरू कर दी है और यार्डों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।

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