सूरत, गुजरात: हीरे और कपड़ों की नगरी सूरत से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है। शहर के लिंबायत इलाके में स्थित मीठी खाड़ी के पास एक रिहायशी इमारत में भीषण आग लगने से एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई। मृतकों में एक 4 साल का मासूम बच्चा और तीन महिलाएं भी शामिल हैं। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि मौत आग की लपटों से ज्यादा दम घुटने (Asphyxiation) के कारण हुई है।
मध्यरात्रि में मची चीख-पुकार: कैसे हुआ हादसा?
मिली जानकारी के अनुसार, हादसा लिंबायत की मीठी खाड़ी स्थित एक तंग गली की सोसाइटी में हुआ। घर के अंदर परिवार के सदस्य सो रहे थे, तभी अचानक आग की लपटें उठने लगीं। देखते ही देखते धुएं का गुबार पूरी इमारत में फैल गया। स्थानीय लोगों ने खिड़कियों से धुआं निकलता देख तुरंत दमकल विभाग को सूचित किया। सूचना मिलते ही दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और राहत कार्य शुरू किया।
दमकलकर्मियों ने घर के अंदर फंसे लोगों को बाहर निकाला और तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
डॉक्टरों ने पांचों सदस्यों को मृत घोषित कर दिया।
एक ही झटके में उजड़ गया पूरा परिवार
इस अग्निकांड ने अंसारी परिवार की खुशियां छीन लीं। पुलिस द्वारा जारी की गई मृतकों की सूची दिल दहला देने वाली है:
- शाहनाज़ बेगम अब्दुल कलाम अंसारी (65 वर्ष) – परिवार की बुजुर्ग महिला।
- शबीना रमज़ान अली अंसारी (28 वर्ष) 3. परवीन अब्दुल कलाम अंसारी (19 वर्ष)
- हुसा बेगम अब्दुल कलाम अंसारी (18 वर्ष)
- शुभान रमज़ान अली अंसारी (4 वर्ष) – मासूम बच्चा।
मौत की वजह: 10 टन साड़ियाँ और दम घोंटू धुआं
घटनास्थल का मुआयना करने के बाद अधिकारियों ने जो खुलासे किए, वे चौंकाने वाले हैं। पूर्व महापौर दक्षेशभाई मावानी और मुख्य अग्निशमन अधिकारी ने बताया कि जिस घर में आग लगी, वहां रहने की जगह कम और साड़ियों का गोदाम ज्यादा था।
पूर्व महापौर ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “यह परिवार साड़ी बनाने और उन पर काम करने का व्यवसाय करता था। दुख की बात यह है कि एक बेहद छोटे से घर में लगभग 10 टन साड़ियां ठूस-ठूस कर रखी गई थीं। घर के अंदर चलने-फिरने तक की जगह नहीं थी।”
अधिकारियों के अनुसार, जब आग लगी तो साड़ियों के सिंथेटिक कपड़े के कारण बहुत जहरीला और काला धुआं पैदा हुआ। चूंकि साड़ियों के ढेर ने निकास के रास्तों को लगभग बंद कर दिया था, इसलिए परिवार को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला और दम घुटने से उनकी मौत हो गई।
यह भी पढ़ें-बेंगलुरु: खौफनाक अंत! पार्टनर की आत्महत्या देख 17वीं मंजिल से कूदी IBM टेक कर्मी, कोथनूर में मातम
प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई
हादसे की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और ‘एक्सीडेंटल डेथ’ का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आग लगने के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम भी साक्ष्य जुटा रही है। शॉर्ट सर्किट को आग लगने का प्रारंभिक कारण माना जा रहा है।
रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों पर सवाल
सूरत का लिंबायत इलाका अपनी तंग गलियों और सघन आबादी के लिए जाना जाता है। इस हादसे ने एक बार फिर रिहायशी घरों के भीतर व्यावसायिक स्टॉक (खासकर ज्वलनशील सामग्री) रखने के खतरों को उजागर कर दिया है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी ने लोगों से अपील की है कि वे सुरक्षा मानकों की अनदेखी न करें और घरों में भारी मात्रा में ऐसा सामान न रखें जो आग लगने की स्थिति में जानलेवा साबित हो सके।
निष्कर्ष: लापरवाही ने ली मासूमों की जान
यह हादसा महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा नियमों के प्रति लापरवाही का परिणाम भी है। 10 टन साड़ियों के बीच रह रहे परिवार को शायद अंदाजा नहीं था कि उनकी रोजी-रोटी का जरिया ही एक दिन उनकी जान ले लेगा। पूरे इलाके में इस समय सन्नाटा पसरा है और हर कोई इस बदकिस्मत परिवार के लिए न्याय और प्रार्थना कर रहा है।







