कोलंबो/वॉशिंगटन: हिंद महासागर की लहरें बुधवार को उस समय रक्तरंजित हो गईं, जब श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास एक अमेरिकी पनडुब्बी (US Submarine) ने ईरानी नौसेना के युद्धपोत पर हमला कर उसे जलसमाधि दे दी। इस भीषण हमले में अब तक 80 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह अपनी तरह का पहला ऐसा हमला है, जिसने वैश्विक राजनीति और समुद्री सुरक्षा के समीकरणों को पूरी तरह हिला कर रख दिया है।
श्रीलंका के पास भीषण त्रासदी: 180 लोग थे सवार
ईरान की नौसेना का अत्याधुनिक मौज-क्लास फ्रिगेट, IRIS Dena, भारत के विशाखापत्तनम में आयोजित बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास MILAN 2026 में भाग लेकर वापस लौट रहा था। इसी दौरान श्रीलंका के तट से कुछ दूर अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में इसे निशाना बनाया गया।
श्रीलंकाई नौसेना के प्रवक्ता बुद्धिका संपथ ने कोलंबो में मीडिया से बात करते हुए बताया, “जहाज के डूबने से भारी तबाही हुई है। हमने समुद्र से अब तक कई ईरानी नाविकों के शव बरामद किए हैं। कुल 80 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य अभी भी लापता हैं।”
श्रीलंका के विदेश मंत्रालय के अनुसार, जहाज पर कुल 180 कर्मी सवार थे। संकट की सूचना मिलते ही श्रीलंकाई नौसेना और वायुसेना ने युद्ध स्तर पर बचाव अभियान शुरू किया।
अस्पतालों में आपातकाल: घायलों की स्थिति गंभीर
बचाव अभियान के दौरान सुरक्षित निकाले गए नाविकों को तत्काल चिकित्सा सहायता दी जा रही है। श्रीलंका के स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. अनिल जयसिंघे ने बताया कि 79 लोगों को अस्पताल लाया गया है। इनमें से एक की हालत अत्यंत नाजुक है और सात अन्य का आपातकालीन आईसीयू (ICU) में इलाज चल रहा है। बाकी बचे हुए लोगों को मामूली चोटें आई हैं, लेकिन वे गहरे सदमे में हैं।
अमेरिका ने स्वीकारा हमला: ‘ऐतिहासिक सैन्य कार्रवाई’
इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए अमेरिकी रक्षा सचिव (US Defense Secretary) पीट हेगसेथ ने एक बयान जारी किया। उन्होंने पुष्टि की कि एक अमेरिकी पनडुब्बी ने अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत ईरानी युद्धपोत को निशाना बनाया। हेगसेथ ने इस हमले को रणनीतिक आवश्यकता बताया, हालांकि उन्होंने आधिकारिक तौर पर मरने वालों की संख्या पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्र के भीतर से किया गया यह हमला ईरान के सैन्य मनोबल को तोड़ने के लिए अमेरिका की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
ईरान-इजरायल-यूएस युद्ध का पांचवां दिन: खमैनी की मौत से भड़की आग
यह घटना उस समय हुई है जब मध्य पूर्व (Middle East) भीषण युद्ध की आग में जल रहा है। 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ यह संघर्ष अब अपने पांचवें दिन में प्रवेश कर चुका है। तनाव तब चरम पर पहुँच गया जब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर आई, जिसके बाद अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर चौतरफा हमले शुरू कर दिए।
अब तक के युद्ध की मुख्य बातें:
- हवाई हमले: अमेरिका और इजरायल ने ईरान के भीतर लगभग 2000 ठिकानों को तबाह कर दिया है।
- परमाणु खतरा: हमलों का मुख्य लक्ष्य ईरान की परमाणु सुविधाएं और बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च पैड्स हैं।
- जवाबी कार्रवाई: ईरान ने दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति लाइन, ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया है।
- मिसाइल वार: तेहरान ने इजरायल के प्रमुख शहरों, तेल अवीव और यरुशलम पर सैकड़ों ड्रोन और मिसाइलें दागी हैं।
वैश्विक समुद्री मार्गों पर मंडराता खतरा
IRIS Dena पर हुए इस हमले ने अब युद्ध को खाड़ी देशों से निकालकर हिंद महासागर के खुले पानी तक फैला दिया है। सैन्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि हिंद महासागर में इस तरह की कार्रवाई जारी रही, तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार और रसद आपूर्ति (Global Supply Chain) पूरी तरह ठप हो सकती है।
श्रीलंका वर्तमान में केवल मानवीय सहायता और बचाव कार्य पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, लेकिन दक्षिण एशिया के द्वार पर हुई इस सैन्य कार्रवाई ने भारत सहित सभी पड़ोसी देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। दुनिया अब एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ एक छोटी सी चिंगारी तीसरे विश्व युद्ध का रूप ले सकती है।
आगामी अपडेट के लिए बने रहें: क्या ईरान इस हमले का बदला लेने के लिए हिंद महासागर में अपनी और पनडुब्बियां तैनात करेगा? क्या वैश्विक शक्तियां इस युद्ध को रोकने में सफल होंगी?
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