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महंगाई का ‘अप्रैल फूल’: कमर्शियल LPG सिलिंडर ₹195.50 महंगा, पश्चिम एशिया संकट ने बिगाड़ा रसोई का बजट

On: April 1, 2026 3:55 AM
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कमर्शियल गैस सिलिंडर की बढ़ती कीमतें, महंगाई का असर।

नई दिल्ली: नए वित्त वर्ष (2026-27) के पहले ही दिन देश के व्यापारियों, होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को महंगाई का एक बड़ा और कड़वा झटका लगा है। सरकारी तेल कंपनियों ने बुधवार को कमर्शियल एलपीजी (19 किलोग्राम) सिलिंडर की कीमतों में 195.50 रुपये की भारी बढ़ोतरी कर दी है। यह वृद्धि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई अचानक तेजी और पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष का सीधा परिणाम मानी जा रही है।

क्यों बढ़ी कीमतें? पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक दबाव

बाजार विशेषज्ञों और ऊर्जा विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते सैन्य तनाव और अस्थिरता के कारण वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) प्रभावित हुई है। इस भू-राजनीतिक तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है। चूंकि भारत अपनी तेल और गैस जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाली छोटी सी हलचल का भी घरेलू कीमतों पर गहरा असर पड़ता है।

दिल्ली से मुंबई तक: नए दामों पर एक नजर

सरकारी तेल कंपनियों द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश की राजधानी दिल्ली में अब 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलिंडर की कीमत 2,078.50 रुपये हो गई है। मध्यमवर्गीय व्यापारियों के लिए चिंता की बात यह है कि पिछले एक महीने के भीतर ही कमर्शियल गैस की कीमतों में यह दूसरी बड़ी वृद्धि है।

इससे पहले 1 मार्च को भी कीमतों में 114.5 रुपये का इजाफा किया गया था। यदि पिछले 30 दिनों का हिसाब देखा जाए, तो व्यापारिक गैस के दाम 300 रुपये से भी अधिक बढ़ चुके हैं। यह वृद्धि छोटे व्यापारियों और मध्यम स्तर के खाद्य व्यवसायों की कमर तोड़ने के लिए काफी है।

रेस्टोरेंट और ढाबों पर पड़ेगा सीधा असर

कमर्शियल गैस सिलिंडर का उपयोग मुख्य रूप से होटलों, रेस्टोरेंट्स, ढाबों और कैटरिंग उद्योग में होता है। गैस के दाम बढ़ने से इन व्यवसायों की लागत (Input Cost) में भारी बढ़ोतरी होगी।

  • बाहर खाना होगा महंगा: रेस्टोरेंट मालिक अपनी बढ़ी हुई लागत की भरपाई करने के लिए खाने-पीने की वस्तुओं के दाम बढ़ा सकते हैं।
  • कैटरिंग सेवाओं पर बोझ: शादियों और पार्टियों के सीजन में कैटरिंग सेवाओं के रेट बढ़ने की पूरी संभावना है।
  • स्ट्रीट फूड वेंडर्स: छोटे स्टाल लगाने वाले वेंडर्स के लिए अपना मुनाफा बचाना अब एक बड़ी चुनौती बन जाएगा।

घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत

राहत की एकमात्र खबर यह है कि घरेलू रसोई गैस (14.2 किलोग्राम) की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां इसी तरह तनावपूर्ण बनी रहीं और कच्चे तेल के दाम बढ़ते रहे, तो आने वाले समय में घरेलू सिलिंडर की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है।

यह भी पढ़ें-धामी सरकार की बड़ी जीत: ऋषिकेश को जाम से मिलेगी मुक्ति, 1105 करोड़ के 4-लेन बाईपास को केंद्र की हरी झंडी

विशेषज्ञों की राय: आगे क्या?

आर्थिक जानकारों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जब तक शांति बहाल नहीं होती, तब तक ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। तेल कंपनियों के लिए बढ़ती लागत को खुद सहना मुश्किल हो रहा है, जिसका बोझ अंततः उपभोक्ता की जेब पर ही डाला जा रहा है। आने वाले दिनों में लॉजिस्टिक और परिवहन लागत बढ़ने से अन्य आवश्यक वस्तुओं जैसे सब्जियों और अनाज के दामों में भी उछाल देखने को मिल सकता है।

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