देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में चर्चित रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश कुमार जोशी की मौत के मामले में पुलिस को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने मामले की जांच को आगे बढ़ाते हुए 10वें आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला शहर के सुरक्षित माने जाने वाले इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था और सड़कों पर बढ़ती गुंडागर्दी को लेकर कई सवाल खड़े कर चुका है।
मुख्य आरोपियों से मुठभेड़ के बाद खुला राज
बीते शुक्रवार और शनिवार (3-4 अप्रैल, 2026) की दरमियानी रात देहरादून पुलिस और बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़ ने इस केस में अहम मोड़ ला दिया था। पुलिस ने घेराबंदी कर दो मुख्य आरोपियों, शांतनु त्यागी और काविश त्यागी को दबोच लिया। मुठभेड़ के दौरान काविश के पैर में गोली लगी थी, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।
इन दो मुख्य गिरफ्तारियों के बाद पुलिस ने अपनी तफ्तीश का दायरा बढ़ाया और अब 10वें आरोपी की गिरफ्तारी सुनिश्चित की है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ में राजधानी में सक्रिय कई आपराधिक गिरोहों के संबंधों का खुलासा हो रहा है।
अब तक सलाखों के पीछे पहुँच चुके आरोपी
पुलिस की मुस्तैदी और गहन छानबीन के चलते इस मामले में अब तक कुल 10 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। इससे पहले पुलिस ने निम्नलिखित आरोपियों को जेल भेजा था:
- रोहित कुमार
- मोहम्मद अखलाक
- संदीप कुमार
- आदित्य चौधरी
- आदेश गिरी
- समीर चौधरी
- मोहित अरोड़ा
इन आरोपियों की गिरफ्तारी से यह साफ हो गया है कि यह कोई सामान्य दुर्घटना नहीं थी, बल्कि सड़कों पर वर्चस्व की लड़ाई (गैंगवार) का नतीजा था, जिसकी कीमत एक निर्दोष और सम्मानित पूर्व सैन्य अधिकारी को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
क्या था पूरा मामला? मॉर्निंग वॉक बनी अंतिम सफर
घटना उस समय की है जब 75 वर्षीय रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश कुमार जोशी अपनी नियमित दिनचर्या के अनुसार सुबह की सैर पर निकले थे। वह तुलाज ग्रीन सोसाइटी स्थित अपने निवास से अपने साढू और एक अन्य साथी के साथ मसूरी रोड की तरफ टहल रहे थे।
घर से महज 200 मीटर की दूरी पर पहुँचते ही मसूरी रोड की तरफ से दो कारें अत्यधिक तेज रफ्तार में आईं। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, दोनों कारों में सवार युवक एक-दूसरे पर अंधाधुंध फायरिंग कर रहे थे। इसी सरेराह हो रही गैंगवार के बीच एक गोली अनियंत्रित होकर ब्रिगेडियर जोशी के सीने में जा लगी। अस्पताल ले जाने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना ने पूरे राज्य में आक्रोश और दुख की लहर पैदा कर दी थी।
राजपुर रोड गोलीकांड के बाद पुलिस की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
राजपुर रोड और मसूरी रोड जैसे पॉश इलाकों में हुई इस भीषण वारदात के बाद देहरादून पुलिस ने अपनी सुरक्षा रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। डीजीपी और एसएसपी के निर्देशों पर शहर के चप्पे-चप्पे पर चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है।
- मॉर्निंग वॉकर्स की सुरक्षा: अब पुलिसकर्मी सुबह के समय केवल गश्त नहीं कर रहे, बल्कि खुद मॉर्निंग वॉक करने वालों और राहगीरों के पास जाकर उनका हाल जान रहे हैं। पुलिस यह सुनिश्चित कर रही है कि लोगों के मन से अपराध का डर खत्म हो।
- प्रमुख चौराहों पर नाकेबंदी: पथरी बाग चौक समेत शहर के सभी प्रवेश और निकास द्वारों पर पुलिस की पैनी नजर है। संदिग्ध वाहनों की सघन तलाशी ली जा रही है।
- अपराधियों पर शिकंजा: पुलिस अपराधियों के बीच यह संदेश भेजने की कोशिश कर रही है कि सड़कों पर कानून हाथ में लेने वालों के साथ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।
सामाजिक और सुरक्षा दृष्टिकोण: एक सैन्य अधिकारी का खोना
ब्रिगेडियर मुकेश कुमार जोशी का इस तरह चले जाना समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है। एक अधिकारी जिसने जीवन भर देश की सीमाओं की रक्षा की, उसे अपने ही शहर की सुरक्षित सड़कों पर उपद्रवियों की गोलियों का शिकार होना पड़ा। इस घटना ने “स्मार्ट सिटी” और “सुरक्षित सिटी” के दावों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़कों पर युवाओं द्वारा की जा रही रफ़्तार और हथियारों की नुमाइश को रोकने के लिए और अधिक सख्त कानूनों की जरूरत है। फिलहाल, पुलिस 10वें आरोपी से पूछताछ कर रही है ताकि घटना में शामिल अन्य संभावित चेहरों और हथियारों की बरामदगी की जा सके।







