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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे: एशिया के सबसे लंबे ‘ग्रीन कॉरिडोर’ का सफर शुरू, पीएम मोदी 4 अप्रैल को करेंगे लोकार्पण

On: April 2, 2026 4:42 AM
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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर गणेशपुर-डाटकाली 12 किमी एलिवेटेड ग्रीन कॉरिडोर का हवाई दृश्य

नई दिल्ली/देहरादून: दिल्ली से उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के बीच की दूरी अब घंटों नहीं बल्कि मिनटों का खेल होने वाली है। बहुप्रतीक्षित दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा, 12 किलोमीटर लंबा गणेशपुर-डाटकाली एलिवेटेड रोड, बनकर पूरी तरह तैयार है। इसे एशिया का सबसे लंबा वाइल्डलाइफ ग्रीन कॉरिडोर कहा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 4 अप्रैल को इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लोकार्पण कर इसे जनता को समर्पित कर सकते हैं।

ढाई घंटे में पूरा होगा दिल्ली से दून का सफर

इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा के समय में भारी कमी आएगी। वर्तमान में जहाँ इस सफर में 5 से 6 घंटे लगते हैं, वहीं अब यह दूरी महज 2.5 घंटे में तय की जा सकेगी। पूरी परियोजना का सबसे रोमांचक हिस्सा गणेशपुर से डाटकाली के बीच का वह खंड है, जो राजाजी नेशनल पार्क के इको-सेंसिटिव जोन से होकर गुजरता है।

वन्यजीवों के लिए वरदान: विकास और पर्यावरण का संतुलन

इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘ग्रीन’ होना है। पहले यहाँ सड़क चौड़ीकरण की योजना थी, जिससे लगभग 80 से 90 हजार पेड़ों को काटना पड़ता। लेकिन पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए एनएचएआई (NHAI) ने एलिवेटेड रोड का विकल्प चुना, जिससे पेड़ों की कटान घटकर केवल 11 हजार रह गई।

  • एलिफेंट अंडरपास: वन्यजीवों की निर्बाध आवाजाही के लिए सड़क के नीचे दो विशेष एलिफेंट अंडरपास और आठ वन्यजीव गलियारे (Wildlife Corridors) बनाए गए हैं।
  • स्वच्छंद विचरण: पिलरों पर सड़क बनने से नीचे का पूरा वन क्षेत्र जानवरों के लिए खाली है। रिपोर्ट के अनुसार, वन्यजीवों ने इन गलियारों को स्वीकार कर लिया है और वे बेखौफ इनका उपयोग कर रहे हैं।
    तकनीकी बारीकियां और बुनियादी ढांचा
    1500 करोड़ रुपये के बजट से तैयार इस 12 किमी लंबी एलिवेटेड रोड को अत्याधुनिक इंजीनियरिंग का नमूना माना जा रहा है:
  • कुल पिलर: 575 स्तंभों पर टिकी है यह सड़क।
  • कनेक्टिविटी: यह उत्तर प्रदेश के सहारनपुर (गणेशपुर) को उत्तराखंड के देहरादून (डाटकाली) से जोड़ती है।
  • टनल और फ्लाईओवर: डाटकाली पर नई टनल और आरटीओ चेकपोस्ट तक फ्लाईओवर का निर्माण किया गया है ताकि ट्रैफिक बिना रुके चलता रहे।

सुरक्षा और सुविधा के कड़े इंतजाम

एक्सप्रेसवे पर यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए एनएचएआई ने कई आधुनिक कदम उठाए हैं:

  • स्पीड कंट्रोल: ओवरस्पीडिंग रोकने के लिए 16 हाई-टेक स्पीड डिटेक्शन कैमरे लगाए गए हैं। नियम तोड़ने पर ऑटोमैटिक चालान सीधे कंट्रोल रूम से जनरेट होगा।
  • गति सीमा: हल्के वाहनों के लिए अधिकतम रफ्तार 100 किमी/घंटा और भारी वाहनों के लिए 80 किमी/घंटा तय की गई है।
  • नेटवर्क कनेक्टिविटी: पुराने मोहंड मार्ग पर मोबाइल नेटवर्क की समस्या को दूर करने के लिए 12 नए मोबाइल टावर लगाए गए हैं।
  • ले-बाई और क्रेन: यदि कोई वाहन खराब होता है, तो उसके लिए सड़क के किनारे अतिरिक्त चौड़ाई (ले-बाई) दी गई है। साथ ही 24/7 पेट्रोलिंग गाड़ियां और क्रेन तैनात रहेंगी।

चुनौतियों के बीच पूरा हुआ निर्माण

अक्टूबर 2021 में शुरू हुई इस परियोजना का सफर आसान नहीं था। पर्यावरण संगठनों के विरोध, सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी की निगरानी के बीच काम पूरा हुआ। वन्यजीवों की शांति भंग न हो, इसलिए काम के घंटों को 24 घंटे से घटाकर 12 घंटे किया गया। साथ ही मानसून के दौरान नदी क्षेत्र में काम बंद रखना पड़ा, फिर भी एनएचएआई ने समय सीमा के भीतर इस इंजीनियरिंग चमत्कार को हकीकत में बदल दिया।

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डाटकाली मंदिर के श्रद्धालुओं का रखा विशेष ध्यान

प्रसिद्ध डाटकाली मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए 14 करोड़ की लागत से एक अलग 700 मीटर लंबा घुमावदार ओवरपास बनाया गया है। यह ब्रिज मुख्य एलिवेटेड रोड को क्रॉस करते हुए श्रद्धालुओं को बिना किसी खतरे के मंदिर तक पहुँचाएगा।

पूरी परियोजना पर एक नजर

यह 12 किमी का खंड 11,970 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली 213 किलोमीटर लंबी दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे परियोजना का एक हिस्सा है। इस पूरी परियोजना में:

  • 29 किमी का कुल एलिवेटेड खंड।
  • 05 रेलवे ओवर ब्रिज (ROB)।
  • 110 वाहन अंडरपास।
  • 76 किमी की सर्विस रोड।

निष्कर्ष:

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगा बल्कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास के नए द्वार खोलेगा। यह प्रोजेक्ट दुनिया को यह संदेश देता है कि आधुनिक बुनियादी ढांचे का विकास, पर्यावरण और वन्यजीवों को नुकसान पहुँचाए बिना भी संभव है।

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