टपकेश्वर महादेव मंदिर,जहाँ गुफा से शिवलिंग पर गिरता था दूध,यही द्रोणचार्य को पुत्र प्राप्ति का वरदान मिला था।


टपकेश्वर महादेव मंदिर,जहाँ गुफा से शिवलिंग पर गिरता था दूध,यही द्रोणचार्य को पुत्र प्राप्ति का वरदान मिला था।

टपकेश्वर महादेव मंदिर,रिपोर्ट-तोहिष भट्टदेहरादून से सात कि.मी. की दूरी पर टपकेश्वर मंदिर स्थित है। बाबा के इस धाम पर देशभर से कई लोग दर्शन करने आते हैं। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। पौराणिक मान्यता है कि आदिकाल में भगवान शंकर ने यहां देवताओं की प्रार्थना से प्रसन्न होकर उन्हें देवेश्वर के रूप में दर्शन दिए थे।

यह मंदिर है अश्वत्थामा की जन्मस्थली व तपस्थली

टपकेश्वर महादेव मंदिर,जहाँ गुफा से शिवलिंग पर गिरता था दूध,यही द्रोणचार्य को पुत्र प्राप्ति का वरदान मिला था।

मान्यता है कि इसी जगह को द्रोणपुत्र अश्वत्थामा की जन्मस्थली व तपस्थली माना गया है, जहां अश्वत्थामा के माता-पिता गुरु द्रोणाचार्य व कृपि की पूजा-अर्चना से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया था। जिसके बाद ही उनके घर अश्वत्थामा का जन्म हुआ था।एक बार की बात है कि अश्वत्थामा ने अपनी माता कृपि से दूध पीने की इच्छा जाहिर की, जब उनकी यह इच्छा पूरी न हो सकी तब अश्वत्थामा ने घोर तप किया। जिससे प्रसन्न होकर भगवान भोलेनाथ ने वरदान के रूप में गुफा से दुग्ध की धारा बहा दी।

तब से ही यहां पर दूध की धारा गुफा से शिवलिंग पर टपकने लगी, जिसने कलियुग में जल का रूप ले लिया। इसलिए यहां भगवान भोलेनाथ को टपकेश्वर कहा जाता है। मान्यता यह भी है कि अश्वत्थामा को यहीं भगवान शिव से अमरता का वरदान मिला। उनकी गुफा भी यहीं है जहां उनकी एक प्रतिमा भी विराजमान है।

महादेव ने गुरु द्रोण को अस्त्र-सस्त्र का ज्ञान दिया

एक लोक मान्यता यह भी है कि गुरू द्रोणाचार्य को इसी स्थान पर भगवान शंकर का आर्शीवाद प्राप्त हुआ था। स्वयं महादेव ने आचार्य को यहां अस्त्र-शस्त्र और पूर्ण धनुर्विद्या का ज्ञान दिया था।जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से यहां मनोकामना मांगता है ,उसकी मनोकामना जरूर पूर्ण होती है।

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