हरिद्वार/देहरादून: उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा के आगाज में अब कुछ ही दिन शेष हैं। देवभूमि में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुगम और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए शासन-प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। इसी कड़ी में, चारधाम यात्रा पर जाने वाले व्यावसायिक वाहनों के लिए अनिवार्य ‘ग्रीन कार्ड’ बनाने की प्रक्रिया कल यानी सोमवार से विधिवत रूप से शुरू होने जा रही है।
उत्तराखंड के परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा सोमवार को हरिद्वार के रोशनाबाद स्थित एआरटीओ (ARTO) कार्यालय में आयोजित एक विशेष समारोह में इस व्यवस्था का औपचारिक उद्घाटन करेंगे।
19 अप्रैल से शुरू हो रही है यात्रा, तैयारियों ने पकड़ा जोर
इस वर्ष चारधाम यात्रा 19 अप्रैल से शुरू होने जा रही है। हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाली केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की इस यात्रा में हर साल देश-विदेश से 50 लाख से अधिक श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचते हैं। इतनी बड़ी संख्या में आने वाले यात्रियों की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए परिवहन विभाग ‘ग्रीन कार्ड’ प्रणाली लागू करता है।
परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस बार भी यात्रियों की सुविधा को देखते हुए नारसन, रोशनाबाद और ऋषिकेश में विशेष पंजीकरण केंद्र स्थापित किए गए हैं, ताकि वाहन स्वामियों को कार्ड बनवाने में किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
क्या है ग्रीन कार्ड और क्यों है जरूरी?
चारधाम यात्रा के दौरान पहाड़ी रास्तों पर चलने वाले व्यावसायिक वाहनों के लिए ‘ग्रीन कार्ड’ एक अनिवार्य दस्तावेज है। यह कार्ड इस बात का प्रमाण होता है कि वाहन पूरी तरह से फिट है और पहाड़ की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में चलने के योग्य है। बिना ग्रीन कार्ड के किसी भी कमर्शियल वाहन को यात्रा मार्ग पर आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जाती है।
एआरटीओ निखिल शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि ग्रीन कार्ड जारी करने से पहले वाहन के सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जाएगी। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट
- * वैध बीमा (Insurance) दस्तावेज
- प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC)
- परमिट और टैक्स रसीदें
निर्धारित शुल्क और लक्ष्य
परिवहन विभाग ने इस वर्ष भी ग्रीन कार्ड के लिए पारदर्शी शुल्क व्यवस्था लागू की है:
- छोटे वाहनों के लिए: 450 रुपये।
- बड़े वाहनों (बस/ट्रक) के लिए: 650 रुपये।
विभाग को उम्मीद है कि इस साल भी वाहनों का आंकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में अधिक रहेगा। आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल लगभग 7,500 से अधिक वाहनों के ग्रीन कार्ड बनाए गए थे, और इस बार यह संख्या 8,000 के पार पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
सुरक्षा पर विशेष ध्यान: अनफिट वाहनों पर रहेगी नजर
ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य केवल पंजीकरण नहीं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। पहाड़ी सड़कों पर अक्सर तकनीकी खराबी के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए विभाग सख्त कदम उठा रहा है। केवल उन्हीं वाहनों को कार्ड जारी किए जाएंगे जो मानकों पर खरे उतरेंगे। परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा खुद इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी स्तर पर परेशानी का सामना न करना पड़े।
प्रशासन की अपील: समय पर करवाएं पंजीकरण
परिवहन विभाग ने सभी टैक्सी-मैक्सी और बस ऑपरेटरों से अपील की है कि वे अंतिम समय की भीड़ से बचने के लिए समय रहते अपने वाहनों का निरीक्षण करवाकर ग्रीन कार्ड प्राप्त कर लें। सोमवार से रोशनाबाद, नारसन और ऋषिकेश के केंद्रों पर कर्मचारियों की अतिरिक्त तैनाती की गई है ताकि पंजीकरण प्रक्रिया तेज गति से चल सके।
निश्चित रूप से, ग्रीन कार्ड व्यवस्था की शुरुआत के साथ ही चारधाम यात्रा 2026 का बिगुल बज चुका है। अब बस इंतजार है 19 अप्रैल का, जब कपाट खुलने के साथ ही ‘जय बद्री विशाल’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से पूरी घाटी गूंज उठेगी।









