हल्द्वानी/नैनीताल: देवभूमि उत्तराखंड में सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर और ब्लॉगर्स के बीच चल रहा आपसी विवाद अब जानलेवा मोड़ लेने लगा है। शनिवार शाम एक हाई-प्रोफाइल ड्रामा उस समय सामने आया, जब प्रदेश की चर्चित ब्लॉगर ज्योति अधिकारी ने रानीबाग के जंगलों में फेसबुक/इंस्टाग्राम लाइव आकर आत्महत्या का प्रयास किया। गनीमत रही कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई और अनहोनी होने से पहले ही उन्हें बचा लिया गया।
यह घटना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि हाल ही में ‘बिग बॉस’ फेम अनुराग डोभाल (यूके 07 राइडर) के साथ भी इसी तरह का एक विवाद सामने आया था। एक के बाद एक ब्लॉगर्स द्वारा उठाए जा रहे ऐसे कदम सोशल मीडिया की चकाचौंध के पीछे छिपे मानसिक तनाव और आपसी रंजिश की कहानी बयां कर रहे हैं।
जंगल से लाइव और 25 मिनट का ‘सुसाइड नोट’
शनिवार की शाम जब लोग अपने घरों में थे, तब अचानक ज्योति अधिकारी के सोशल मीडिया अकाउंट से एक लाइव वीडियो शुरू हुआ। वीडियो का बैकग्राउंड रानीबाग स्थित शीतला माता मंदिर के पास का घना जंगल था। ज्योति कैमरे के सामने बिलख-बिलख कर रो रही थीं और उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वह अपनी जीवन लीला समाप्त करने जा रही हैं।
करीब 25 मिनट से अधिक समय तक चले इस लाइव वीडियो में ज्योति ने अपनी पीड़ा साझा की। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें मानसिक रूप से इस कदर प्रताड़ित किया गया है कि अब उनके पास मौत को गले लगाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, दर्शकों में हड़कंप मच गया और तुरंत इसकी सूचना नैनीताल पुलिस को दी गई।
पुलिस की मुस्तैदी ने बचाई जान
मामले की गंभीरता को देखते हुए काठगोदाम पुलिस और एसएचओ विजय मेहता तुरंत हरकत में आए। मोबाइल लोकेशन और स्थानीय इनपुट के आधार पर पुलिस की एक टीम रानीबाग के जंगलों की ओर दौड़ी। गहन तलाशी के बाद पुलिस ने ज्योति अधिकारी को जंगल के भीतर से सकुशल बरामद कर लिया।
एसएचओ विजय मेहता ने मीडिया को बताया:
“सूचना मिलते ही हमने तुरंत टीम को रानीबाग भेजा। ज्योति अधिकारी को सुरक्षित बचा लिया गया है। उन्हें घबराहट और सदमे की स्थिति में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वर्तमान में उनकी स्थिति स्थिर है और डॉक्टरों की देखरेख में उनका उपचार चल रहा है।”
क्या है पूरा विवाद? मानसिक उत्पीड़न और पुलिस पर आरोप
ज्योति अधिकारी ने अपने लाइव वीडियो में किसी का नाम लिए बिना और कुछ स्पष्ट संदर्भों के साथ एक अन्य महिला ब्लॉगर पर गंभीर आरोप लगाए। ज्योति का कहना था कि:
- चरित्र हनन: एक अन्य महिला ब्लॉगर पिछले लंबे समय से सोशल मीडिया पर उनके चरित्र को लेकर अभद्र टिप्पणी कर रही है और झूठे आरोप लगा रही है।
- पुलिस की निष्क्रियता: ज्योति ने आरोप लगाया कि उन्होंने इस मानसिक उत्पीड़न के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने आरोपी पक्ष के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
- साइबर बुलिंग: उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर उन्हें लगातार ट्रोल किया जा रहा है और बदनाम करने की साजिश रची जा रही है, जिससे वह गहरी मानसिक पीड़ा (Mental Trauma) में हैं।
अनुराग डोभाल के बाद उत्तराखंड में दूसरी बड़ी घटना
उत्तराखंड के डिजिटल स्पेस में यह दूसरी बार है जब किसी बड़े नाम ने इस तरह का कदम उठाया है। हाल ही में मशहूर मोटो-ब्लॉगर अनुराग डोभाल ने भी इसी तरह के दबाव और उत्पीड़न की बात कही थी। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड के ब्लॉगर्स के बीच बढ़ती ‘सब्सक्राइबर वॉर’ और आपसी छींटाकशी अब व्यक्तिगत दुश्मनी में तब्दील हो रही है, जिसका परिणाम इस तरह की आत्मघाती धमकियों के रूप में निकल रहा है।
सोशल मीडिया और मानसिक स्वास्थ्य: एक चेतावनी
यह घटना केवल ज्योति अधिकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सोशल मीडिया की दुनिया के काले सच को भी उजागर करती है। ‘लाइक’ और ‘व्यूज’ की दौड़ में लोग एक-दूसरे को नीचा दिखाने के लिए किसी भी हद तक गिर रहे हैं।
विशेषज्ञों की राय:
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाली नफरत (Hate Speech) और साइबर बुलिंग किसी भी व्यक्ति को डिप्रेशन की ओर धकेल सकती है। जब रील लाइफ और रियल लाइफ के बीच का अंतर खत्म हो जाता है, तो व्यक्ति भावनात्मक रूप से टूट जाता है।
निष्कर्ष: क्या होगी आगे की कार्रवाई?
पुलिस अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही है। ज्योति अधिकारी के बयानों के आधार पर यह देखा जाएगा कि क्या वास्तव में उन्हें उकसाया गया था। पुलिस उन सोशल मीडिया अकाउंट्स की भी जांच कर सकती है जिन पर प्रताड़ना का आरोप लगा है।
यह घटना देवभूमि के अन्य युवाओं के लिए भी एक सबक है कि डिजिटल दुनिया के विवादों को जीवन पर हावी न होने दें। प्रशासन ने भी अपील की है कि अगर कोई भी व्यक्ति साइबर बुलिंग का शिकार है, तो वह आत्मघाती कदम उठाने के बजाय कानूनी रास्ता अपनाए।
यह भी पढ़ें-उत्तराखंड में गहराया LPG संकट: हल्द्वानी बेस अस्पताल में सिलेंडर खत्म,भूखे रह सकते हैं मरीज!
अस्वीकरण: आत्महत्या किसी समस्या का समाधान नहीं है। यदि आप या आपके परिचित किसी भी प्रकार के मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं, तो कृपया हेल्पलाइन नंबरों (जैसे ‘किरण’ – 1800-599-0019) पर संपर्क करें।








