हल्द्वानी/नैनीताल:
देवभूमि उत्तराखंड में इन दिनों शादियों की रौनक पर एलपीजी (LPG) सिलेंडर की किल्लत का साया मंडरा रहा है। व्यावसायिक सिलेंडरों की भारी किल्लत ने न केवल आम जनता, बल्कि प्रदेश के बड़े वेडिंग डेस्टिनेशन और कैटरिंग कारोबार को हिला कर रख दिया है। आलम यह है कि जहां एक ओर कैटरिंग संचालकों ने नई बुकिंग लेने से हाथ खड़े कर दिए हैं, वहीं दूसरी ओर रामनगर जैसे पर्यटन स्थलों पर अब खाना पकाने के लिए फिर से पारंपरिक ‘लकड़ी के चूल्हों’ का सहारा लिया जा रहा है।
अप्रैल-मई के सीजन पर संकट के बादल
वर्तमान में 15 मार्च को शादियों का पहला चरण समाप्त हो रहा है, लेकिन असली चिंता 15 अप्रैल से शुरू होने वाले दूसरे चरण को लेकर है। ज्योतिष गणना के अनुसार, इस बार अप्रैल और मई में विवाह के शुभ मुहूर्त काफी कम हैं। अप्रैल में केवल 15, 20, 21, 25 से 29 तारीख और मई में शुरुआती दो हफ्तों में ही मुहूर्त सीमित हैं। मुहूर्त कम होने के कारण एक ही दिन में सैकड़ों शादियां संपन्न होनी हैं। ऐसे में यदि व्यावसायिक सिलेंडरों की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो आने वाले वैवाहिक सत्र में स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
हल्द्वानी: थाली के दाम में ₹150 तक की बढ़ोतरी
कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी में शादियों का सबसे बड़ा बाजार है। यहां लगभग 80 बैंकट हॉल हैं जो सीजन के दौरान पूरी तरह पैक रहते हैं। कैटरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष हर्षवर्धन पांडे के मुताबिक, सिलेंडर न मिलने के कारण अब बिजली से चलने वाले ‘इंडक्शन चूल्हों’ पर निर्भरता बढ़ गई है।
हालांकि, इंडक्शन पर खाना बनाना और उसे बुफे (Buffet) में गर्म रखना काफी खर्चीला साबित हो रहा है। बिजली की खपत बढ़ने और संसाधनों के अभाव के कारण कैटरर्स ने प्रति प्लेट 100 से 150 रुपये तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। बजट को नियंत्रित करने के लिए परिवारों को अपने पसंदीदा व्यंजनों (मेनू) में कटौती करने की सलाह दी जा रही है।
नैनीताल: कैटरिंग की नई बुकिंग बंद, रेस्तरां पर ताला
पर्यटन नगरी नैनीताल में स्थिति और भी गंभीर है। यहां सिलेंडर की किल्लत के चलते चार प्रसिद्ध रेस्तरां में ताला लटक गया है। कैटरिंग संचालक अब ग्राहकों से खुद ही सिलेंडर की व्यवस्था करने की शर्त रख रहे हैं। शहर के प्रमुख कैटरर मनोज साह और सौरभ कश्यप का कहना है कि सिलेंडर की अनिश्चितता के बीच नई बुकिंग लेना जोखिम भरा है। कई संचालकों ने तो पहले से तय बुकिंग्स तक निरस्त करना शुरू कर दिया है, जिससे वर-वधू पक्ष की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
रामनगर: रिजॉर्ट्स में फिर दहकने लगे चूल्हे
डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए मशहूर रामनगर के करीब 250 होटलों और रिजॉर्ट्स में आधुनिक चूल्हों की जगह अब धुआं उगलते लकड़ी के चूल्हों ने ले ली है। होटल एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि तलने और उबालने वाले भारी काम अब लकड़ी के चूल्हों पर किए जा रहे हैं। पर्यटकों के लिए भी कई डिशेज को मेनू से हटा दिया गया है क्योंकि उन्हें गैस पर पकाना संभव नहीं हो पा रहा। तंदूर की संख्या बढ़ा दी गई है ताकि रोटी और अन्य पकवान पारंपरिक तरीके से तैयार किए जा सकें।
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बाजार से गायब हुए इंडक्शन चूल्हे
गैस संकट का सीधा असर अब इलेक्ट्रॉनिक मार्केट पर भी दिख रहा है। जिले में इंडक्शन चूल्हों की मांग में अचानक 500% तक का उछाल आया है। जो स्टोर्स दिन भर में दो-तीन इंडक्शन बेचते थे, वहां अब 15 से 20 चूल्हों की रोजाना मांग है। आलम यह है कि स्थानीय बाजारों के साथ-साथ ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर भी नामी ब्रांड्स के इंडक्शन चूल्हे ‘आउट ऑफ स्टॉक’ हो गए हैं। दो किलोवाट के साधारण इंडक्शन की कीमतें भी आसमान छू रही हैं।
निष्कर्ष: प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में ‘वेडिंग टूरिज्म’ का बड़ा योगदान है। यदि 15 अप्रैल से शुरू होने वाले सीजन से पहले व्यावसायिक सिलेंडरों की आपूर्ति बहाल नहीं की गई, तो यह न केवल व्यापारियों के लिए आर्थिक नुकसान होगा, बल्कि हजारों परिवारों की खुशियों में भी खलल डालेगा। अब सबकी नजरें प्रशासन और आपूर्ति विभाग पर टिकी हैं कि वे इस संकट से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।








