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अनिल अंबानी की रिलायंस पावर पर ED का बड़ा एक्शन: मुंबई में एक साथ 12 ठिकानों पर छापेमारी, वित्तीय अनियमितताओं का आरोप

On: March 6, 2026 5:16 AM
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मुंबई में रिलायंस पावर के कार्यालय पर ईडी (ED) की छापेमारी और सुरक्षा बलों की तैनाती का दृश्य।

मुंबई/नई दिल्ली।
देश के दिग्गज उद्योगपति अनिल अंबानी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार तड़के रिलायंस पावर लिमिटेड और अनिल अंबानी से जुड़ी विभिन्न कंपनियों व उनके करीबियों के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई शुरू की है। मनी लॉन्ड्रिंग और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के मामले में जांच एजेंसी ने मुंबई के अलग-अलग हिस्सों में ताबड़तोड़ छापेमारी की है। इस कार्रवाई के बाद से कॉर्पोरेट जगत और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
तड़के शुरू हुई कार्रवाई: 15 टीमों ने संभाली कमान
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय की लगभग 15 विशेष इकाइयों ने शुक्रवार सुबह एक साथ मुंबई के 10 से 12 स्थानों पर अपनी तलाशी अभियान (Search Operation) शुरू किया। छापेमारी की यह प्रक्रिया बेहद गोपनीय रखी गई थी और तड़के ही ईडी के अधिकारी सुरक्षा बलों के साथ चिन्हित ठिकानों पर पहुंच गए।
यह छापेमारी रिलायंस पावर से जुड़े अधिकारियों के पंजीकृत कार्यालयों (Registered Offices) और उनके आवासीय परिसरों पर केंद्रित है। जांच का मुख्य केंद्र उन व्यक्तियों को बनाया गया है जो कंपनी के वित्तीय फैसलों और फंड ट्रांसफर की प्रक्रिया में सीधे तौर पर शामिल रहे हैं।
क्यों हो रही है छापेमारी? (जांच का मुख्य आधार)
हालांकि, प्रवर्तन निदेशालय ने अभी तक इस मामले में कोई औपचारिक प्रेस विज्ञप्ति या बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट’ (PMLA) के तहत की जा रही है।
छापेमारी के मुख्य संभावित कारण:
* संदिग्ध फंड ट्रांसफर: जांच एजेंसी को रिलायंस पावर और उससे जुड़ी सहायक कंपनियों के बीच संदिग्ध लेन-देन के इनपुट मिले हैं। आरोप है कि फंड का इस्तेमाल उन उद्देश्यों के लिए नहीं किया गया जिनके लिए वे आवंटित किए गए थे।
* वित्तीय अनियमितता: कथित तौर पर कंपनी के खातों में कुछ ऐसी विसंगतियां पाई गई हैं जो मनी लॉन्ड्रिंग की ओर इशारा करती हैं।
* शेल कंपनियों का लिंक: ईडी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या फंड को इधर-बधर करने के लिए फर्जी या शेल कंपनियों का सहारा लिया गया है।
अनिल अंबानी और रिलायंस पावर की पुरानी मुश्किलें
यह पहली बार नहीं है जब अनिल अंबानी जांच एजेंसियों के रडार पर आए हैं। पिछले कुछ वर्षों में उनकी कई कंपनियां भारी कर्ज और कानूनी लड़ाइयों का सामना कर रही हैं। इससे पहले भी फेमा (FEMA) के कथित उल्लंघन को लेकर उनसे पूछताछ हो चुकी है। रिलायंस पावर, जो कभी रिलायंस अनिल धीरभाई अंबानी ग्रुप (ADAG) की प्रमुख कंपनियों में से एक थी, वर्तमान में कई वित्तीय चुनौतियों से जूझ रही है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और जांच का दायरा
मुंबई में जिन स्थानों पर छापेमारी चल रही है, वहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। जांच अधिकारियों ने डिजिटल साक्ष्य, लैपटॉप, हार्ड ड्राइव और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को अपने कब्जे में लेना शुरू कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, यह जांच केवल मुंबई तक सीमित नहीं रहेगी, आने वाले दिनों में इसका दायरा दिल्ली और अन्य शहरों तक भी फैल सकता है।
प्रशासन और जांच टीम की कोशिश है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान साक्ष्यों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो सके। ईडी की 15 अलग-अलग टीमें बारीकी से एक-एक बैंक ट्रांजेक्शन का मिलान कर रही हैं।
बाजार पर असर
इस खबर के बाहर आते ही शेयर बाजार में रिलायंस पावर के शेयरों पर दबाव देखा जा सकता है। निवेशकों के बीच इस कार्रवाई को लेकर अनिश्चितता का माहौल है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईडी को पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो कंपनी के प्रबंधन और अनिल अंबानी के लिए कानूनी मुश्किलें काफी बढ़ सकती हैं।
निष्कर्ष:
अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस ग्रुप के लिए यह समय अत्यंत चुनौतीपूर्ण है। एक तरफ जहां वे कर्ज मुक्त होने की कोशिशों में जुटे थे, वहीं ईडी की इस नई कार्रवाई ने उनके पुनरुद्धार की योजनाओं को झटका दिया है। अब सभी की नजरें प्रवर्तन निदेशालय के अगले कदम और आधिकारिक बयान पर टिकी हैं।

यह भी पढ़ें- पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद चार दिवसीय उत्तराखंड प्रवास पर: भीमताल में सुरक्षा के कड़े इंतजाम, जानें पूरा कार्यक्रम

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