हरियाणा के पंचकूला में मित्तल परिवार की सामूहिक आत्महत्या के मामले ने एक और पहलू को उजागर किया है—वह कार जिसमें सात शव मिले, दरअसल प्रवीण मित्तल ने अपने मित्र गंभीर सिंह नेगी के नाम पर खरीदी थी। नेगी ने यह कार अपने नाम पर केवल दोस्ती और भरोसे के आधार पर फाइनेंस करवाई थी, जब मित्तल ने कहा कि उनके पास किसी परिचित का नाम नहीं है।
गंभीर सिंह नेगी, जो देहरादून के मालदेवता इलाके के निवासी हैं, ने बताया कि उनकी मित्तल से मुलाकात एक एनजीओ में कार्य करते समय हुई थी। तब से दोनों के बीच पारिवारिक संबंध बन गए थे। मित्तल ने वर्ष 2021 में उनसे कार फाइनेंस कराने का आग्रह किया और आश्वासन दिया कि वह समय पर किस्त चुकाते रहेंगे। बीते चार वर्षों में उन्होंने गूगल पे के माध्यम से सभी किश्तें भरते हुए अपनी जिम्मेदारी निभाई।
हालांकि, दो महीने पहले से किस्तों का भुगतान रुक गया था। नेगी ने बताया कि इस दौरान उनकी मित्तल से फोन पर बातचीत होती रही, लेकिन इस देरी पर कोई चर्चा नहीं हुई। लगभग एक साल पहले मित्तल ने बताया था कि वह चंडीगढ़ शिफ्ट हो चुके हैं। नेगी आज भी यह समझ नहीं पा रहे हैं कि एक ऐसा व्यक्ति, जो वर्षों से व्यवस्थित और जिम्मेदार दिखता था, आखिर किस मानसिक अवस्था में इतना कठोर कदम उठा बैठा।
मित्तल एनजीओ चलाते थे, लेकिन उनके अन्य व्यवसायों या गतिविधियों की जानकारी नेगी के पास नहीं थी। उन्होंने बताया कि वे आज भी विश्वास नहीं कर पा रहे कि उनका विश्वासपात्र मित्र आत्महत्या जैसा कदम उठा सकता है। यह घटना उनके लिए भावनात्मक आघात से कम नहीं है, क्योंकि इस घटना के पीछे की वास्तविक पीड़ा और परिस्थिति अभी भी रहस्य बनी हुई है।
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