उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई जब समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ सांसद रामजी लाल सुमन को मथुरा जाने से रोक दिया गया। पुलिस ने सोमवार को उनके आगरा स्थित आवास पर पहुंचकर एक आधिकारिक नोटिस सौंपा, जिसमें उन्हें मथुरा न जाने की चेतावनी दी गई थी। यह रोक उस समय लगाई गई जब सुमन दलित उत्पीड़न की एक घटना के पीड़ितों से मिलने प्रतिनिधिमंडल के साथ मथुरा रवाना होने वाले थे।
नोटिस पाकर सांसद का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने मौके पर ही पुलिस द्वारा दिया गया नोटिस फाड़ दिया और विरोध जताते हुए कहा कि यह कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा, “यह सरकार दलितों की आवाज़ को दबाने पर तुली है और कानून-व्यवस्था के नाम पर आम जनता की भावनाओं को कुचला जा रहा है।”
सपा सांसद का कहना है कि उत्तर प्रदेश में दलितों पर अत्याचार अब असहनीय हो चला है और सरकार चुपचाप तमाशा देख रही है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि ऐसी घटनाएं साबित करती हैं कि सत्ता दबंगों के पक्ष में खड़ी है, जबकि पीड़ित न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब रामजी लाल सुमन को इस तरह से रोका गया हो। पूर्व में भी उन्हें कई बार कार्यक्रमों और आंदोलनों में भाग लेने से रोका गया है। यह घटना उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था और राजनीतिक असंतोष को एक बार फिर चर्चा में ले आई है।
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