नई दिल्ली/कोटद्वार |
देश की राजनीति में इन दिनों ‘मोहब्बत की दुकान’ बनाम ‘नफरत के बाजार’ की बहस जोरों पर है। इसी बीच, उत्तराखंड के कोटद्वार से शुरू हुआ एक छोटा सा विवाद अब राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बन गया है। सोमवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली में कोटद्वार के चर्चित युवा दीपक कुमार (जिन्हें अब ‘मोहम्मद’ दीपक के नाम से जाना जा रहा है) से मुलाकात की। राहुल गांधी ने इस मुलाकात के जरिए न केवल दीपक का हौसला बढ़ाया, बल्कि उन्हें वर्तमान दौर में संविधान और इंसानियत का सबसे बड़ा रक्षक करार दिया।
विवाद की जड़: 26 जनवरी की वह खौफनाक शाम
इस पूरी कहानी की शुरुआत गणतंत्र दिवस यानी 26 जनवरी 2026 को कोटद्वार के पटेल मार्ग स्थित एक दुकान से हुई। आरोप है कि ‘बाबा स्कूल ड्रेस’ नाम की एक दुकान, जिसे वकील अहमद पिछले 30 वर्षों से चला रहे हैं, वहां कुछ युवक पहुंचे। खुद को एक हिंदू संगठन का सदस्य बताने वाले इन युवकों ने दुकानदार पर नाम बदलने का दबाव बनाया और अंजाम भुगतने की धमकी दी।
यही वह मोड़ था जहां जिम संचालक दीपक कुमार उर्फ अक्की की एंट्री हुई। जब विवाद बढ़ने लगा और सांप्रदायिक रंग लेने लगा, तब दीपक ने बीच-बचाव किया। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में दीपक खुद को ‘मोहम्मद दीपक’ बताते हुए शांति की अपील करते नजर आए। उनका तर्क था कि पहचान से ऊपर इंसानियत है, और इसी साहस ने उन्हें रातों-रात चर्चा में ला दिया।
राहुल गांधी के साथ मुलाकात: “यह केवल सम्मान नहीं, संदेश है”
दिल्ली में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के संचार विभाग के सचिव वैभव वालिया के नेतृत्व में दीपक कुमार और उनके साथियों ने राहुल गांधी से भेंट की। मुलाकात के दौरान राहुल गांधी काफी प्रभावित नजर आए। उन्होंने दीपक की पीठ थपथपाते हुए कहा कि “दीपक जैसे युवा ही भारत के असली हीरो हैं, जो नफरत की आंधी के सामने संविधान का दीया जलाकर खड़े हैं।”
राहुल गांधी ने इस मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि दीपक कुमार ‘मोहब्बत की दुकान’ के जीते-जागते प्रतीक हैं। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि यह मुलाकात केवल एक व्यक्ति का व्यक्तिगत सम्मान नहीं है, बल्कि उस सोच का सम्मान है जो समाज में करुणा और सेवा भाव को जीवित रखना चाहती है।
कानूनी पेचीदगियां और पुलिसिया कार्रवाई
इस मामले ने जहां एक ओर मानवीय संवेदनाओं को जगाया, वहीं दूसरी ओर यह कानूनी दांव-पेच में भी उलझ गया है। कोटद्वार पुलिस ने इस मामले में दोतरफा कार्रवाई की है:
- बजरंग दल की तहरीर: कमल पाल की शिकायत पर दीपक उर्फ अक्की और विजय रावत के खिलाफ गाली-गलौज और जानलेवा हमले की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
- पुलिस बनाम अज्ञात: सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और नेशनल हाईवे जाम करने के आरोप में पुलिस ने 30-40 अज्ञात लोगों पर भी केस दर्ज किया है।
- दुकानदार की व्यथा: वकील अहमद ने पुलिस को दी शिकायत में स्पष्ट किया है कि उन्हें डराया-धमकाया गया, जिसके बाद ही विवाद की स्थिति पैदा हुई।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
दीपक और राहुल गांधी की इस मुलाकात ने उत्तराखंड की राजनीति में भी गरमाहट पैदा कर दी है। महानगर कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय मित्तल और युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष विजय रावत सहित कई स्थानीय नेताओं की मौजूदगी यह दर्शाती है कि कांग्रेस इस मुद्दे को ‘संविधान बचाओ’ अभियान के एक बड़े हिस्से के रूप में देख रही है।
निष्कर्ष: क्या ‘मोहम्मद दीपक’ बदलेंगे समाज की सोच?
कोटद्वार की गलियों से निकलकर दिल्ली के लुटियंस जोन तक पहुंची यह कहानी केवल एक विवाद की नहीं है। यह कहानी है उस साहस की, जहां एक युवक अपनी पहचान को किनारे रखकर दो समुदायों के बीच ढाल बनकर खड़ा हो गया। हालांकि कानूनी जांच अभी जारी है, लेकिन राहुल गांधी के हस्तक्षेप ने इसे ‘विचारधारा की जंग’ बना दिया है।
समाज के लिए यह घटना एक बड़ा सवाल छोड़ती है: क्या हम पहचान की दीवारों में सिमट कर रह जाएंगे या दीपक जैसे युवाओं की तरह ‘इंसानियत के धर्म’ को प्राथमिकता देंगे?









