देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश के खेल विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से देहरादून, हल्द्वानी, रुद्रपुर और हरिद्वार के संपूर्ण खेल ढांचे को पुनर्गठित कर उन्हें नए नामों के साथ एकीकृत किया है। यह निर्णय प्रदेश के युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं, उच्चस्तरीय प्रशिक्षण और आधुनिक आधारभूत ढांचा उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
देहरादून के रायपुर स्थित खेल ढांचे को मिला नया नाम – ‘रजत जयंती खेल परिसर’
देहरादून के रायपुर क्षेत्र में स्थित महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज, राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम और अन्य सभी खेल संबंधित संस्थानों को एकीकृत करते हुए अब इसे ‘रजत जयंती खेल परिसर’ के नाम से जाना जाएगा। यह नाम राज्य की स्थापना की 25वीं वर्षगांठ को ध्यान में रखते हुए रखा गया है।
हल्द्वानी बना ‘मानसखंड खेल परिसर’
हल्द्वानी के गौलापार क्षेत्र में स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, हॉकी ग्राउंड, तरणताल, बहुद्देश्यीय क्रीड़ा गृह सहित अन्य खेल संरचनाओं को मिलाकर अब ‘मानसखंड खेल परिसर’ का रूप दिया गया है। यह नाम कुमाऊं क्षेत्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को दर्शाता है।
रुद्रपुर का नया नाम ‘शिवालिक खेल परिसर’
रुद्रपुर स्थित मनोज सरकार स्टेडियम, साइक्लिंग वेलोड्रोम और अन्य खेल आधारभूत सुविधाओं को मिलाकर अब ‘शिवालिक खेल परिसर’ नाम दिया गया है। यह नाम क्षेत्र की भौगोलिक विशेषता शिवालिक पर्वत श्रृंखला के आधार पर रखा गया है।
हरिद्वार को मिला आध्यात्मिक पहचान के साथ ‘योगस्थली खेल परिसर’ का नाम
हरिद्वार के रोशनाबाद क्षेत्र में स्थित वंदना कटारिया हॉकी स्टेडियम, बहुद्देश्यीय क्रीड़ा गृह, स्विमिंग पूल आदि सभी खेल संस्थानों को एकीकृत करते हुए ‘योगस्थली खेल परिसर’ नाम दिया गया है। यह नाम हरिद्वार की योग और आध्यात्मिक विरासत को दर्शाता है।
नई सुविधाओं और प्रशिक्षकों की होगी नियुक्ति
खेल मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि राज्य सरकार ‘स्पोर्ट्स लीगेसी स्कीम’ के तहत इन खेल परिसरों में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार करेगी। इस योजना के अंतर्गत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी और सहायक स्टाफ की व्यवस्था को भी सुदृढ़ किया जाएगा। इसके लिए देश के अन्य राज्यों के बेहतरीन खेल मॉडल्स का अध्ययन किया गया है और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया जैसी संस्थाओं की तकनीकी सहायता भी ली जा रही है।
सरकार का यह कदम न केवल उत्तराखंड को एक खेल हब के रूप में विकसित करेगा, बल्कि प्रदेश के खिलाड़ियों को भी ऊंचे स्तर की प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करेगा।
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