Navratri Day 1 2026: 7 Important Details on Maa Puja
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Navratri 2026 Day 1: आज मां शैलपुत्री को कैसे करें प्रसन्न? जानें पूजा विधि, मंत्र और भोग का खास महत्व

On: October 11, 2026 6:27 AM
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Navratri Day 1 2026 showing Maa Shailputri worship, puja mantra, ghee bhog and Ghatasthapana rituals on the first day of Sharadiya Navratri.

Navratri Day 1 2026: शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से शुरू हो रहा है। नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इस दिन भक्त घरों और मंदिरों में घटस्थापना करते हैं। मां शैलपुत्री की आराधना के साथ नौ दिनों तक चलने वाले देवी उत्सव की शुरुआत होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री की पूजा से शक्ति, सुख-समृद्धि और आत्मविश्वास का आशीर्वाद मिलता है।

अगर आप भी Navratri Day 1 2026 पर पूजा या कलश स्थापना करने जा रहे हैं, तो तिथि, पंचांग, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और भोग से जुड़ी जानकारी जान लें।

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11 अक्टूबर 2026 का पंचांग

रविवार को आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि है। इसी तिथि से शारदीय नवरात्रि का आरंभ माना गया है। पंचांग में चंद्रमा की राशि कन्या और नक्षत्र चित्रा बताया गया है।

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  • दिन: रविवार
  • विक्रम संवत: 2083
  • मास: आश्विन
  • पक्ष: शुक्ल पक्ष
  • तिथि: प्रतिपदा
  • योग: वैधृति
  • नक्षत्र: चित्रा
  • करण: चतुष्पाद
  • चंद्र राशि: कन्या
  • सूर्य राशि: कन्या
  • सूर्योदय: सुबह 6:19 बजे
  • सूर्यास्त: शाम 5:56 बजे
  • चंद्रोदय: सुबह 6:53 बजे
  • चंद्रास्त: शाम 6:01 बजे

पंचांग के अनुसार, राहुकाल शाम 4:29 बजे से 5:56 बजे तक बताया गया है। इस अवधि में परंपरागत रूप से शुभ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। मुहूर्त और तिथि की गणना स्थान के अनुसार अलग हो सकती है।

Navratri Day 1 2026: घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना यानी कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। इसे देवी का आह्वान करने और पूजा की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार, घटस्थापना के लिए दो समय बताए गए हैं।

  • सुबह का मुहूर्त: सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक।
  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक।

पूजा करने से पहले अपने शहर के स्थानीय पंचांग से मुहूर्त की पुष्टि कर लें। धार्मिक विधियों में स्थान और परंपरा के अनुसार अंतर हो सकता है।

कौन हैं मां शैलपुत्री?

मां शैलपुत्री नवदुर्गा के नौ स्वरूपों में प्रथम देवी हैं। ‘शैल’ का अर्थ पर्वत और ‘पुत्री’ का अर्थ बेटी होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वह पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं। उनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल का फूल होता है। उनका वाहन वृषभ यानी बैल है।

पौराणिक कथाओं में मां शैलपुत्री को माता सती का पुनर्जन्म माना गया है। मान्यता है कि सती ने अपने पूर्व जन्म में देह त्यागने के बाद हिमालय के घर जन्म लिया और शैलपुत्री के रूप में पूजी गईं। उनका विवाह भगवान शिव से हुआ। मां शैलपुत्री को शक्ति, स्थिरता और दृढ़ संकल्प का प्रतीक भी माना जाता है।

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मां शैलपुत्री का प्रिय रंग और पूजा मंत्र

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा में सफेद और हल्के पीले रंग का इस्तेमाल शुभ माना जाता है। भक्त इन रंगों के फूल और वस्त्र अर्पित कर सकते हैं। हालांकि, पूजा में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा और भक्ति को माना जाता है।

मां शैलपुत्री की आराधना के दौरान इस मंत्र का जाप किया जाता है:

मंत्र: ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥

बीज मंत्र: ॐ शं शैलपुत्री देव्यै नमः॥

धार्मिक मान्यता के अनुसार, भक्त 108 बार मंत्र जाप कर सकते हैं। अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार जाप की संख्या रखी जा सकती है।

मां शैलपुत्री को किस चीज का भोग लगाएं?

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री को गाय के शुद्ध घी का भोग लगाने की परंपरा है। इसके अलावा खीर, पेड़ा, मावा के लड्डू या अन्य सफेद मिठाइयां भी अर्पित की जा सकती हैं। पूजा के बाद प्रसाद परिवार और अन्य श्रद्धालुओं में बांटा जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि मां को घी का भोग लगाने से आरोग्य और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। यह आस्था पर आधारित परंपरा है।

Navratri Day 1 2026: मां शैलपुत्री की पूजा कैसे करें?

नवरात्रि के पहले दिन पूजा के लिए इन चरणों का पालन कर सकते हैं:

  1. स्नान और तैयारी: सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  2. पूजा स्थल की सफाई: मंदिर या पूजा स्थान को साफ करें और अपनी परंपरा के अनुसार शुद्धिकरण करें।
  3. कलश स्थापना: शुभ मुहूर्त में विधि के अनुसार घटस्थापना करें।
  4. मां का आह्वान: चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर मां शैलपुत्री की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
  5. पूजन सामग्री: मां को रोली, अक्षत, कुमकुम और फूल अर्पित करें।
  6. दीपक और धूप: घी का दीपक जलाएं और धूप अर्पित करें।
  7. भोग: मां शैलपुत्री को घी, खीर या मिठाई का भोग लगाएं।
  8. मंत्र जाप: ‘ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः’ मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
  9. आरती: दुर्गा चालीसा या अपनी परंपरा के अनुसार पाठ करें और अंत में मां की आरती करें।

नवरात्रि के पहले दिन का धार्मिक महत्व

शारदीय नवरात्रि को मां दुर्गा की आराधना का महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा के साथ भक्त नौ दिनों के व्रत और साधना का संकल्प लेते हैं। कई घरों में अखंड ज्योति जलाई जाती है और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है।

Navratri Day 1 2026 पर पूजा करते समय स्वच्छता, श्रद्धा और अपनी पारिवारिक परंपराओं का ध्यान रखें। व्रत रखने वाले लोग अपनी सेहत के अनुसार भोजन और उपवास की योजना बनाएं। नवरात्रि का संदेश शक्ति, भक्ति और सकारात्मक संकल्प के साथ आगे बढ़ने का है।

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