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केदारनाथ यात्रा पर आंशिक रोक: भारी बारिश से पैदल मार्ग पर भू-धंसाव और मलबा, मंदाकिनी-अलकनंदा नदियाँ चेतावनी स्तर के पार

On: July 30, 2026 4:13 AM
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Heavy landslide debris and rocks blocking the narrow trekking path to Kedarnath Temple with flooded river in background.

​रुद्रप्रयाग/फाटा:

केदारघाटी में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर केदारनाथ धाम जाने वाले तीर्थयात्रियों और स्थानीय प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। केदारनाथ पैदल मार्ग पर कई स्थानों पर भारी मात्रा में मलबा और बड़े बोल्डर (चट्टानें) गिरने के कारण यात्रा को एहतियातन आंशिक रूप से रोक दिया गया है। इसके साथ ही अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों का जलस्तर उफान पर पहुँचकर चेतावनी स्तर को पार कर गया है, जिससे तटीय इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है।

​नदियों का जलस्तर चेतावनी स्तर से ऊपर, प्रशासन अलर्ट

​रुद्रप्रयाग जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र द्वारा जारी सुबह की रिपोर्ट के अनुसार, जनपद में हो रही बारिश से नदियों के जलस्तर में अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

•  ​अलकनंदा नदी: अलकनंदा का जलस्तर 626.89 मीटर दर्ज किया गया, जबकि इसका चेतावनी स्तर 626.00 मीटर और खतरे का निशान 627.00 मीटर है। नदी इस समय खतरे के निशान के बेहद करीब बह रही है।
•  ​मंदाकिनी नदी: मंदाकिनी नदी का जलस्तर 625.90 मीटर पर पहुँच गया है, जो इसके 625.00 मीटर के चेतावनी स्तर को पार कर चुका है।

​हालाँकि, गंगानगर और गौरीकुंड क्षेत्रों में नदियों का जलस्तर फिलहाल चेतावनी स्तर से नीचे बना हुआ है।

​स्थानीय प्रशासन किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क है। नगर पालिका और नगर पंचायतों की टीमों द्वारा रुद्रप्रयाग शहर और आसपास के तटीय इलाकों में लाउडस्पीकर के जरिए जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। नदी तटों के पास रहने वाले लोगों और व्यापारियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने तथा नदियों से दूर रहने की हिदायत दी जा रही है।

​पैदल मार्ग बाधित, सड़कें ठप

​बारिश और भूस्खलन के कारण केदार घाटी में जनजीवन के साथ-साथ सड़क यातायात भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-107) पर मुनकटिया क्षेत्र में पहाड़ियों से मलबा आने के कारण मार्ग अवरुद्ध हो गया है। इसके अलावा, गौरीकुंड से आगे श्री केदारनाथ पैदल यात्रा मार्ग पर दो से तीन संवेदनशील स्थानों पर भारी मलबा और पत्थर गिरने से रास्ते बंद हो गए हैं।

​मौसम विभाग के अनुसार, पूरे जिले में घने बादल और कोहरा छाया हुआ है। बीते 24 घंटों के बारिश के आँकड़ों पर नज़र डालें तो:

• ​जखोली: 54.00 मिमी (सर्वाधिक)
• ​ऊखीमठ: 38.20 मिमी
• ​रुद्रप्रयाग: 4.00 मिमी

​लगातार हो रही इस बारिश के कारण जिले के अंदर संपर्क मार्ग भी बुरी तरह चरमरा गए हैं। वर्तमान में:

• ​राष्ट्रीय राजमार्ग (NH): 3 स्थान बंद
• ​राज्य मार्ग (SH): 3 स्थान बंद
• ​लोक निर्माण विभाग (PWD) की सड़कें: 10 मार्ग बंद
• ​PMGSY की सड़कें: 13 मार्ग बंद
• ​NPCC की सड़कें: 2 मार्ग बाधित

​मार्गों को खोलने के लिए जेसीबी और भारी मशीनरी को मौके पर तैनात किया गया है, लेकिन रुक-रुक कर हो रहे भूस्खलन से कार्य में बाधा आ रही है।

​फाटा में फिर सक्रिय हुआ संवेदनशील स्लाइडिंग जोन, गुणवत्ता पर सवाल

​एक तरफ जहाँ प्राकृतिक आपदा ने यात्रा को रोका है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी ढाँचे के निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। फाटा-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग पर रामपुर बाजार के समीप स्थित संवेदनशील ‘स्लाइडिंग जोन’ एक बार फिर सक्रिय हो गया है।

​यहाँ सुरक्षा दीवार (पुस्ता) और सड़क के बीच दोबारा भू-धंसाव शुरू हो गया है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि इस वर्ष फरवरी और मार्च के महीने में इस स्थान पर करोड़ों रुपये की लागत से सुरक्षा कार्य शुरू किया गया था। यात्रा सीजन शुरू होने से पहले इसे पूरा करने का बड़ा दावा किया गया था।

​हालाँकि, जून महीने के पहले सप्ताह में हुई शुरुआती बारिश में ही यह पुस्ता धंस गया था। उस समय राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के अधिकारियों ने निर्माण कार्य में लापरवाही की बात स्वीकार करते हुए दोबारा उच्च गुणवत्ता के साथ स्थायी सुरक्षा कार्य कराने का भरोसा दिया था। इसके बावजूद, मानसून की पहली कुछ बारिशों में ही उसी स्थान पर दोबारा भू-धंसाव होना निर्माण कार्य प्रणाली और प्रयुक्त सामग्री पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।

​स्थानीय व्यापारियों और ग्रामीणों में इस लापरवाही को लेकर भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों का वैज्ञानिक और तकनीकी तरीके से स्थायी उपचार करने के बजाय केवल ‘खानापूर्ति’ की जा रही है। हर साल सरकारी बजट खर्च किया जाता है, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी रहती है।

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​जिला प्रशासन की अपील और निर्देश

​हालात की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने आम नागरिकों, तीर्थयात्रियों और वाहन चालकों के लिए परामर्श जारी किया है:

1. ​अनावश्यक यात्रा से बचें: मौसम सामान्य होने तक और मार्गों की स्थिति स्पष्ट होने तक अनावश्यक यात्रा न करें।
2. ​सत्यापित जानकारी लें: यात्रा शुरू करने से पहले मौसम विभाग की चेतावनी और सड़क की ताजा स्थिति की जानकारी आधिकारिक माध्यमों से अवश्य प्राप्त करें।
3. ​नदी किनारों से दूरी बनाए रखें: नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए तटबंधों और संवेदनशील क्षेत्रों के पास न जाएँ।
4.  ​तत्काल सूचना दें: किसी भी प्रकार की आपदा, दुर्घटना या मार्ग अवरुद्ध होने की स्थिति में तुरंत जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (DEOC) से संपर्क करें।

​प्रशासन का कहना है कि जैसे ही मौसम साफ होगा और पैदल मार्ग से मलबा हटा दिया जाएगा, केदारनाथ यात्रा को सुरक्षित तरीके से पुनः पूर्ण रूप से संचालित कर दिया जाएगा। तब तक श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

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