भारत की सड़कों पर हर घंटे औसतन 55 लोग जान गंवा रहे हैं, और इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है—सड़क नियमों का खुला उल्लंघन। Cars24 के एक हालिया सर्वे ने इस भयावह सच्चाई पर रोशनी डाली है। इस सर्वे के मुताबिक, देश में हर सातवां वाहन चालक ट्रैफिक नियम तोड़ रहा है और 2024 में कुल 8 करोड़ चालान काटे गए। इनमें 55% चौपहिया वाहनों और 45% दुपहिया वाहनों के खिलाफ हैं। चौंकाने वाली बात ये है कि चालान की कुल रकम 12,000 करोड़ रुपये बनती है, पर वसूली सिर्फ 3,000 करोड़ की ही हो पाई।
सर्वे ने यह भी उजागर किया कि सबसे ज्यादा उल्लंघन ओवरस्पीडिंग के मामले में होता है—कुल चालानों का 49%। इसके बाद हेलमेट और सीट बेल्ट न पहनने पर 19%, रेड लाइट जम्प करने या गलत दिशा में वाहन चलाने पर 18% और गलत पार्किंग पर 14% चालान होते हैं। ये आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि अधिकतर वाहन चालक गाड़ी की रफ्तार को लेकर लापरवाह हैं और यही भारत को सड़क हादसों के मामले में दुनिया में सबसे खतरनाक देशों में रखता है।
दिलचस्प बात यह है कि भारत में ट्रैफिक नियमों को गंभीरता से न लेने की मानसिकता भी एक बड़ी समस्या है। सर्वे में शामिल 1,000 लोगों में से 17.6% ने माना कि वे केवल ट्रैफिक पुलिस को देखकर ही सावधानी बरतते हैं, जबकि 31.2% लोग पुलिस की मौजूदगी में ही नियमों का पालन करते हैं। केवल 43.9% लोग ही ऐसे हैं जो हर स्थिति में नियमों का पालन करते हैं। इसका अर्थ है कि लगभग आधे लोग ट्रैफिक पुलिस के डर के बिना नियम तोड़ने में संकोच नहीं करते।
इस सबका नतीजा यह है कि भारत की सड़कों पर हर दिन औसतन 474 लोग जान गंवा रहे हैं। जब तक कानून का सख्त पालन, जनता में जागरूकता और ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार नहीं होता, तब तक सड़कों पर यह मौत का तांडव थमता नहीं दिखता।
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