देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल ने स्वतंत्रता सेनानियों के उत्तराधिकारियों के सम्मान में जो संवेदनशीलता और तत्परता दिखाई, वह प्रशासनिक सेवा में एक आदर्श प्रस्तुत करती है। एक बैठक में 15 मिनट की देरी से पहुंचने पर उन्होंने न केवल हाथ जोड़कर क्षमा मांगी, बल्कि बैठक में मौजूद हर व्यक्ति की समस्याओं को प्राथमिकता से सुनकर तत्काल समाधान की प्रक्रिया भी शुरू कर दी।
इस मौके पर डीएम बंसल ने स्मार्ट सिटी की बसों में सेनानियों के परिजनों को मुफ्त यात्रा की सुविधा देने, अस्पतालों में अलग काउंटर खोलने और पेंशन एरियर के भुगतान जैसे कई अहम निर्देश भी दिए। उन्होंने भूमि आवंटन संबंधी मुद्दों को भी गंभीरता से लिया और नगर आयुक्त को फोन पर व्यक्तिगत हस्तक्षेप कर कार्यवाही को तेज करने को कहा। पुराने कोर्ट परिसर में सेनानी भवन को लेकर चल रहे विवादों को भी मौके पर सुलझा दिया गया।
स्वतंत्रता संग्राम की विरासत को सहेजने की दिशा में भी जिलाधिकारी ने कई ठोस कदम उठाए हैं। ऐतिहासिक स्थल खाराखेत के सुंदरीकरण के लिए डीपीआर तैयार कर काम जल्द शुरू करने की बात कही गई, जबकि पुराने जेल परिसर में बने स्मारकों के जीर्णोद्धार को स्वीकृति दी गई। एमडीडीए को बांगखाला में सेनानियों के नाम पर द्वार निर्माण के निर्देश भी जारी हुए हैं।
इसके अतिरिक्त, परिवहन निगम की बसों में अभद्र व्यवहार की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने महाप्रबंधक को पत्र भेजा है, ताकि जिम्मेदारों पर आवश्यक कार्रवाई हो सके। यह उदाहरण दर्शाता है कि एक संवेदनशील प्रशासनिक अधिकारी कैसे जनसेवा और राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाता है।
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