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हरिद्वार मर्डर केस: रिटायर्ड एयरफोर्स जवान की हत्या का चौंकाने वाला खुलासा, इकलौते बेटे ने ही रची पूरी साज़िश

On: December 1, 2025 1:47 PM
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उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में 29 नवंबर की रात हुई रिटायर्ड एयरफोर्स कर्मी भगवान सिंह की हत्या ने पूरे क्षेत्र को हिलाकर रख दिया था। पहले यह मामला किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा लिफ्ट लेकर हत्या करने का प्रतीत हो रहा था, लेकिन पुलिस जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, सच सामने आते ही सभी हैरान रह गए। दरअसल, इस हत्या के पीछे कोई बाहरी शख्स नहीं, बल्कि खुद मृतक का इकलौता बेटा यशपाल ही मास्टरमाइंड निकला। बताया जा रहा है कि उसने दोस्तों के साथ मिलकर पिता की करोड़ों की संपत्ति के लालच में यह खौफनाक साज़िश रची थी।
कैसे खुली परतें? बेटे की कहानी में मिलने लगे झोल
29 नवंबर की रात यशपाल ने खुद पुलिस को फोन कर बताया कि उसके पिता को किसी अज्ञात युवक ने लिफ्ट लेते हुए गोली मार दी और फरार हो गया। उसने दावा किया कि वे दोनों उसके एक दोस्त की शादी में जा रहे थे।
लेकिन पुलिस की शुरुआती पूछताछ में ही उसकी कहानी संदिग्ध लगने लगी। जब उससे शादी वाले दोस्त का नाम व अन्य जानकारी पूछी गई, तो वह बार-बार अपने बयान बदलने लगा और कोई ठोस जवाब नहीं दे पाया।
जांच में सामने आया कि जिस दिन वह शादी में जाने का दावा कर रहा था, उस दिन उसकी किसी भी दोस्त की शादी थी ही नहीं। इससे पुलिस का शक और गहरा गया।
पूछताछ में टूटा सच, बेटे ने कबूला जुर्म
कई घंटे की सख्त पूछताछ के बाद आखिरकार यशपाल टूट गया। पुलिस के अनुसार, दबाव बढ़ने पर उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया और हत्या की पूरी कहानी बताई। उसने खुलासा किया कि उसने ही अपने दो दोस्तों — ललित मोहन उर्फ राजन और शेखर — के साथ मिलकर पिता की हत्या की योजना बनाई थी।
संपत्ति का लालच बना हत्या की असली वजह
रिटायर्ड जवान भगवान सिंह के पास करोड़ों की प्रॉपर्टी थी। यशपाल उनका इकलौता वारिस था, लेकिन गलत संगत में पड़कर वह पिता से लगातार विवाद करता रहता था।
पिता ने उसके गैरजिम्मेदार रवैये से नाराज होकर उसे संपत्ति से बेदखल करने तक की बात कह दी थी। इसी बात ने यशपाल को अंदर तक हिला दिया और उसने पिता को रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया।
30 लाख रुपये और स्कॉर्पियो में तय हुई सुपारी
हत्या की डील यशपाल ने अपने दोनों दोस्तों के साथ की थी। पुलिस के अनुसार, उसने उन्हें पिता के मर्डर के बदले 30 लाख रुपये और एक स्कॉर्पियो कार देने का वादा किया था।
योजना काफी सोच-समझकर और विस्तार से बनाई गई थी।
कैसे बनाई गई हत्या की योजना?
29 नवंबर की दोपहर तीनों ने पहले नहर पटरी पर जाकर पूरी जगह की रेकी की।
फिर रात में प्लान के मुताबिक यशपाल ने पिता को एक झूठी शादी में चलने के लिए तैयार किया।
• रात करीब 8 बजे दोनों कार से जटवाला पुल के आगे डैम की तरफ पहुंचे।
• वहीं उसके दोस्त राजन और शेखर पहले से इंतजार कर रहे थे।
• भगवान सिंह पहले कार चला रहे थे, पर डैम पहुंचने पर यशपाल ने ड्राइविंग सीट संभाल ली।
• तभी राजन कार के पास आया और यशपाल ने उसे अपना दोस्त बताकर कार में बैठा लिया।
कार में बैठते ही राजन ने तमंचा निकालकर भगवान सिंह की कनपटी पर दो बार फायर किया। गोली लगते ही भगवान सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। राजन तुरंत कार से उतरकर फरार हो गया।
इसके बाद यशपाल ने पुलिस को फोन कर पूरी कहानी को लिफ्ट-किलर की घटना बताकर पेश करने की कोशिश की।
तीनों आरोपी गिरफ्तार, हथियार भी बरामद
पुलिस ने जांच आगे बढ़ाते हुए यशपाल समेत तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों के पास से घटना में इस्तेमाल किया गया तमंचा भी बरामद कर लिया गया है।
इस सनसनीखेज वारदात ने पूरे इलाके को हिला दिया है, जहां एक बेटे ने लालच में अपने ही पिता की निर्दयतापूर्वक हत्या कर दी।

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