Haridwar Elephant Attack: 5 Shocking Details of Farmer’s
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Haridwar Elephant Attack: खेत में घास काट रहे किसान को हाथी ने पटककर मार डाला, ग्रामीणों में आक्रोश

On: October 8, 2026 5:31 PM
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Haridwar Elephant Attack as wild elephant kills farmer in Lalढांग

Haridwar Elephant Attack: हरिद्वार के लालढांग क्षेत्र में जंगली हाथी के हमले से एक ग्रामीण की मौत हो गई। सजनपुर गांव निवासी 52 वर्षीय किसान सतपाल कुंडी कोटेश्वर मंदिर के सामने खेत में घास काटने गए थे। इसी दौरान जंगल की ओर से आए एक जंगली हाथी ने अचानक उन पर हमला कर दिया। हाथी के हमले में किसान गंभीर रूप से घायल हो गए। परिजन उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उनकी हालत को गंभीर देखते हुए हायर सेंटर रेफर किया। इसी दौरान उनकी मौत हो गई।

घटना की जानकारी सामने आने के बाद क्षेत्र में दहशत फैल गई। ग्रामीणों में वन विभाग के खिलाफ नाराजगी भी देखने को मिली। लोगों ने वन विभाग पर हाथियों से सुरक्षा को लेकर पर्याप्त इंतजाम नहीं करने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को संभाला और मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

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Haridwar Elephant Attack खेत में घास काटते समय अचानक पहुंचा हाथी

जानकारी के मुताबिक, सजनपुर गांव के रहने वाले किसान सतपाल रोजमर्रा की तरह खेत में घास काटने के लिए गए थे। बताया गया कि वह कुंडी कोटेश्वर मंदिर के सामने खेत में मौजूद थे। इसी दौरान जंगल की तरफ से एक जंगली हाथी खेत में पहुंच गया।

स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ

हाथी को देखकर आसपास मौजूद लोगों को भी कुछ समझने का मौका नहीं मिला। हाथी ने सतपाल पर हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि हाथी ने उन्हें अपनी सूंड से उठाकर जमीन पर पटकने की कोशिश की। हमले में किसान बुरी तरह घायल हो गए।

घटना के दौरान हाईवे से गुजर रहे कुछ लोगों ने हाथी को किसान पर हमला करते देखा। लोगों ने शोर मचाना शुरू किया। आसपास के लोगों के शोर के बाद हाथी जंगल की ओर चला गया। हालांकि तब तक किसान गंभीर रूप से घायल हो चुके थे।

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सिर पर पैर रखने की बात सामने आई

स्थानीय लोगों के मुताबिक, हाथी काफी आक्रामक था और उसने किसान को कई बार जमीन पर पटकने का प्रयास किया। आरोप है कि हाथी ने उनके सिर पर पैर भी रख दिया, जिससे उनकी हालत बेहद गंभीर हो गई।

घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों और ग्रामीणों ने तत्काल परिजनों को सूचना दी। वन विभाग की टीम को भी मामले की जानकारी दी गई। घायल सतपाल को उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें हायर सेंटर रेफर करने की तैयारी की, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

इस घटना ने लालढांग और आसपास के गांवों में जंगली हाथियों की मौजूदगी को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है।

ग्रामीणों में फूटा गुस्सा, हाईवे जाम करने की कोशिश

किसान की मौत की खबर फैलते ही ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए और वन विभाग के खिलाफ नाराजगी जताई। ग्रामीणों का आरोप है कि इलाके में लंबे समय से हाथियों की आवाजाही बनी हुई है, लेकिन ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

ग्रामीणों ने हरिद्वार-नजीबाबाद मार्ग को जाम करने का प्रयास भी किया। हालांकि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने लोगों को समझाया और उन्हें सड़क से हटाया। पुलिस की समझाइश के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया।

ग्रामीणों ने करीब दो वर्ष पुरानी एक घटना का भी जिक्र किया। उनका आरोप है कि उस समय एक किसान के खेत में हाथी की मौत हुई थी और मामले में किसान को जेल भेजा गया था। अब उसी क्षेत्र में हाथी के हमले में एक किसान की जान जाने के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा

घटना की सूचना मिलने के बाद श्यामपुर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के साथ मृतक के शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया।

श्यामपुर कोतवाली प्रभारी नितेश शर्मा के मुताबिक, पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस और वन विभाग की टीम ने घटना से जुड़े तथ्यों की जानकारी भी जुटाई है। वन विभाग की ओर से हाथी को वापस जंगल की ओर खदेड़ने की बात कही गई है।

वन विभाग ने बढ़ाई गश्त, मुआवजे की कार्रवाई

मामले को लेकर हरिद्वार के डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने कहा कि सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम घटनास्थल पर पहुंच गई थी। घायल ग्रामीण को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

डीएफओ के अनुसार, हमले के बाद जंगली हाथी को जंगल की ओर खदेड़ दिया गया है। साथ ही संभावित संवेदनशील क्षेत्रों में वनकर्मियों की गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। मृतक के परिवार को नियमानुसार मुआवजा देने की कार्रवाई भी की जा रही है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष ने बढ़ाई चिंता

लालढांग क्षेत्र में सामने आया यह Haridwar Elephant Attack मानव और वन्यजीव संघर्ष की गंभीरता को एक बार फिर सामने लाता है। जंगल से सटे इलाकों में खेती और रोजमर्रा के काम के लिए ग्रामीणों का खेतों में जाना आम बात है। दूसरी ओर, हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में अचानक सामना होने से जान का खतरा बना रहता है।

ग्रामीणों की मांग है कि हाथियों की आवाजाही वाले संवेदनशील क्षेत्रों की नियमित निगरानी की जाए और ग्रामीणों को समय रहते चेतावनी देने की व्यवस्था मजबूत की जाए। वन विभाग ने फिलहाल गश्त बढ़ाने और प्रभावित परिवार को नियमानुसार सहायता देने की बात कही है।

घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। अब वन विभाग की निगरानी और गश्त से यह देखना अहम होगा कि लालढांग क्षेत्र में हाथियों और ग्रामीणों के बीच संघर्ष की ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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