हरिद्वार: देव संस्कृति विश्वविद्यालय में शनिवार को आयोजित ‘समान नागरिक संहिता उत्तराखण्ड-2024’ के प्रभावी क्रियान्वयन पर केंद्रित कार्यशाला में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं है, लेकिन यह आज की सामाजिक वास्तविकता बन चुका है।
सीएम धामी ने चिंता जताते हुए कहा कि हाल के वर्षों में लिव-इन संबंधों में रहने वाले कई जोड़ों के बीच रिश्ते खराब हुए हैं, जिनमें कई मामलों में हिंसा और यहां तक कि हत्या जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं। ऐसी स्थितियों में जरूरी है कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले व्यक्तियों का पंजीकरण अनिवार्य हो, ताकि किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में उनकी पहचान और स्थिति स्पष्ट रहे।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि लिव-इन में रहने की जानकारी न सिर्फ सरकारी रिकॉर्ड में होनी चाहिए, बल्कि उनके माता-पिता को भी इसकी सूचना दी जानी चाहिए। उन्होंने साफ किया कि सरकार की मंशा किसी की स्वतंत्रता पर रोक लगाना नहीं, बल्कि लिव-इन में रहने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
कार्यशाला के दौरान मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता को सामाजिक समरसता और न्याय का आधार बताते हुए इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जनजागरूकता और संवाद की आवश्यकता पर बल दिया।
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