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उत्तराखंड में बैंककर्मियों की हड़ताल, एक दिन में करीब 8 हजार करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित

On: January 28, 2026 3:51 AM
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पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह सहित विभिन्न मांगों को लेकर उत्तराखंड में बैंककर्मियों ने मंगलवार को जोरदार प्रदर्शन किया। सुबह करीब दस बजे प्रदेश के अलग-अलग बैंकों के अधिकारी और कर्मचारी देहरादून के एस्ले हॉल स्थित सेंट्रल बैंक के पास एकत्र हुए। यहां से उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए घंटाघर तक रैली निकाली और अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन (यूएफबीयू) के आह्वान पर की गई इस अखिल भारतीय बैंक हड़ताल में सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सहकारी बैंकों के अधिकारी-कर्मचारी शामिल रहे। कुल नौ बैंक यूनियनों ने इस हड़ताल में भाग लिया। हड़ताल के कारण प्रदेशभर में बैंकिंग कार्य ठप रहा, जिससे एक ही दिन में लगभग आठ हजार करोड़ रुपये के लेनदेन पर असर पड़ने का अनुमान लगाया गया है।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि हफ्ते में पांच दिन बैंकिंग कार्य और सभी शनिवार को अवकाश की मांग को लेकर बैंककर्मी लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगों की लगातार अनदेखी कर रही है। उन्होंने बताया कि यह मांग भारतीय बैंक संघ (आईबीए) और यूएफबीयू के बीच वर्ष 2023 में हुए समझौता ज्ञापन तथा 8 मार्च 2024 को हुए सेटलमेंट-कम-जॉइंट नोट में की गई सिफारिशों के अनुरूप है।
वक्ताओं का कहना था कि यदि सोमवार से शुक्रवार तक कार्य समय बढ़ाकर बाकी सभी शनिवार को अवकाश घोषित किया जाता है, तो इससे ग्राहकों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होगी। यूएफबीयू के प्रतिनिधि राजन पुंडीर ने बताया कि एक दिन की हड़ताल से प्रदेश में लगभग आठ हजार करोड़ रुपये के लेनदेन के प्रभावित होने की संभावना है। इस दौरान इंद्र सिंह रावत, अनिल जैन, हेमंत मल्होत्रा, चंद्रकांत जोशी, कमल तोमर सहित कई बैंककर्मी मौजूद रहे।
लगातार चार दिन बंद रहे बैंक
लगातार चार दिनों तक बैंक बंद रहने से आम लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। 24 जनवरी को शनिवार और 25 जनवरी को रविवार होने के कारण बैंक बंद रहे। इसके बाद सोमवार को गणतंत्र दिवस के अवसर पर अवकाश रहा, जबकि चौथे दिन हड़ताल के चलते बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह ठप रहीं। हालांकि बैंककर्मियों का कहना है कि उनका आंदोलन जनता के खिलाफ नहीं, बल्कि बैंकिंग क्षेत्र में हो रहे भेदभाव और कर्मचारियों की लगातार उपेक्षा के विरोध में है।

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