देहरादून: उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले में एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। हत्याकांड में कथित रूप से शामिल वीवीआईपी की संलिप्तता की निष्पक्ष जांच और पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द न्याय दिलाने की मांग को लेकर कांग्रेस पार्टी ने देहरादून में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान बिना पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के लोकभवन का घेराव करने पहुंचे कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया, जिनमें पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत भी शामिल रहे।
लोकभवन के बाहर अचानक धरने पर बैठे कांग्रेस नेता
प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में कांग्रेस के तमाम वरिष्ठ नेता पहले रायपुर रोड स्थित पार्टी कार्यालय में एकत्र हुए। यहाँ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करने के बाद सभी नेता अपने निजी वाहनों से सीधे लोकभवन के लिए रवाना हो गए।
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अचानक हुए इस राजनीतिक घटनाक्रम के तहत जब कांग्रेस नेता लोकभवन के मुख्य गेट पर पहुँचे और अंदर प्रवेश करने की कोशिश की, तो पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें गेट पर ही रोक लिया। इसके बाद आक्रोशित कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मुख्य गेट के बाहर ही धरने पर बैठ गए और सरकार विरोधी नारेबाजी शुरू कर दी।
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दुष्यंत गौतम पर उठे सवाल और वीवीआईपी जांच की मांग
धरने के दौरान प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दो टूक शब्दों में कहा कि अंकिता भंडारी के परिजनों को हर हाल में न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस सनसनीखेज हत्याकांड में संलिप्त बताए जा रहे कथित वीवीआईपी को बिना किसी दबाव के जांच के दायरे में लाया जाना चाहिए और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए।
वहीं, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मीडिया और प्रशासन के सामने तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि अंकिता के माता-पिता मीडिया और जाँच एजेंसियों के सामने पहले ही कथित वीवीआईपी के तौर पर दुष्यंत गौतम का नाम ले चुके हैं। इसके बावजूद जांच एजेंसियां और प्रशासन उनके द्वारा दी गई शिकायतों पर एफआईआर दर्ज करने से क्यों बच रहा है? उन्होंने आरोप लगाया कि जांच के घेरे में आ रहे रसूखदार वीवीआईपी को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
राज्यपाल को ज्ञापन सौंपना चाहती थी पार्टी
कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि कांग्रेस पार्टी अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित रूप से लिप्त वीवीआईपी की भूमिका की जाँच से जुड़े ज्ञापन को सीधे राज्यपाल को सौंपना चाहती थी। इसके लिए राजभवन और लोकभवन से समय माँगा गया था, लेकिन जब कोई संतोषजनक समय नहीं मिला, तो पार्टी ने मजबूरन बिना पूर्व सूचना के लोकभवन पहुँचकर अपना विरोध दर्ज कराने का निर्णय लिया।
इस विरोध प्रदर्शन और गिरफ्तारी के दौरान पूर्व मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व विधायक प्रीतम सिंह, कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दसौनी, आशा मनोरमा डोबरियाल सहित कई प्रमुख नेता और बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने फौरन कार्रवाई करते हुए सभी प्रमुख नेताओं को हिरासत में ले लिया।
कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक अंकिता भंडारी के परिवार को पूर्ण न्याय नहीं मिल जाता और मामले से जुड़े सभी प्रभावशाली चेहरों बेनकाब नहीं किए जाते, तब तक पार्टी सूबे की सरकार के खिलाफ अपना लोकतांत्रिक संघर्ष पूरी ताकत से जारी रखेगी।
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