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अल्मोड़ा में होली से पहले मातम: बसौली के पास 100 मीटर गहरी खाई में गिरी कार, 11 माह के मासूम समेत 3 की मौत

On: February 26, 2026 3:37 PM
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देवभूमि उत्तराखंड के शांत और मनोरम पर्वतीय अंचल अल्मोड़ा से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने न केवल एक परिवार की खुशियों को उजाड़ दिया, बल्कि पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ दी है। होली का त्योहार, जो रंगों, हंसी और मिलाप का प्रतीक माना जाता है, इस बार अल्मोड़ा के बसौली क्षेत्र के लिए मातम और आंसुओं का सैलाब लेकर आया। ताकुला-अल्मोड़ा मोटर मार्ग पर हुआ यह भीषण सड़क हादसा इस बात की गवाही दे रहा है कि पर्वतीय मार्गों पर जरा सी लापरवाही या अनियंत्रित रफ्तार किस तरह काल का ग्रास बन सकती है। गुरुवार का दिन उन परिवारों के लिए किसी बुरे सपने जैसा साबित हुआ जो अपनों के साथ खुशियां मनाकर नई यादों के साथ वापस लौट रहे थे।
हादसे का विवरण देते हुए स्थानीय सूत्रों ने बताया कि ताकुला से अल्मोड़ा की ओर आ रही एक ब्रेजा कार, जिसका पंजीकरण नंबर डीएल-9-सी-बीएच-8402 था, बसौली के समीप अचानक अनियंत्रित हो गई। चालक अर्जुन कुमार संभवतः वाहन पर अपना नियंत्रण खो बैठे और वह सफेद रंग की कार सड़क से करीब 100 मीटर गहरी खाई में जा समाई। खाई इतनी गहरी थी कि कार के नीचे गिरने की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण सन्न रह गए। जैसे ही वाहन खाई में गिरा, उसमें सवार लोगों की चीख-पुकार से पूरा इलाका दहल उठा। स्थानीय ग्रामीण, जो उस समय अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थे, बिना समय गंवाए घटनास्थल की ओर दौड़े और बचाव कार्य में जुट गए।
यह हादसा उस समय हुआ जब कार में सवार सभी लोग झिझाड़ गांव में एक पारिवारिक शादी समारोह में शामिल होने के बाद वापस दिल्ली लौट रहे थे। घर में शादी की शहनाइयां अभी शांत भी नहीं हुई थीं कि मौत की खबर ने परिजनों को झकझोर कर रख दिया। इस दुर्घटना में तीन अनमोल जिंदगियां मौके पर ही खत्म हो गईं। सबसे अधिक दुखद पहलू 11 माह के मासूम रेहान की मृत्यु रही। उस नन्हे बच्चे ने अभी दुनिया को ठीक से देखा भी नहीं था कि नियति ने उसे मौत की आगोश में सुला दिया। रेहान के अलावा, 24 वर्षीय मंजू देवी और 45 वर्षीय दिनेश राम की भी इस हादसे में जान चली गई। मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि मंजर इतना खौफनाक था कि रेस्क्यू टीम के सदस्यों की आंखें भी मासूम के शव को देखकर नम हो गईं।
हादसे की सूचना मिलते ही ताकुला चौकी पुलिस और अल्मोड़ा से फायर ब्रिगेड की टीम आनन-फानन में मौके पर पहुंची। गहरी खाई और पथरीला रास्ता होने के कारण बचाव कार्य में काफी बाधाएं आईं, लेकिन पुलिसकर्मियों और स्थानीय ग्रामीणों के अदम्य साहस ने मुश्किल रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया। रस्सियों और स्ट्रेचर के सहारे घायलों को एक-एक कर खाई से बाहर निकाला गया। इस दुर्घटना में पांच लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनमें चालक अर्जुन कुमार, महेश आर्य, गोपाल राम, जया और संजय कुमार शामिल हैं। घायलों को तत्काल ताकुला के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों के अनुसार, घायलों में से कुछ की स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है और वे जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हैं।
पहाड़ी इलाकों में सड़क दुर्घटनाओं का यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अल्मोड़ा पुलिस अब इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है कि आखिर यह हादसा कैसे हुआ। क्या यह चालक की मानवीय भूल थी, वाहन में कोई तकनीकी खराबी आई थी या सड़क की खराब स्थिति इसके लिए जिम्मेदार थी। हालांकि शुरुआती जांच में इसे तेज रफ्तार या तीखे मोड़ पर नियंत्रण खोने का मामला माना जा रहा है। पुलिस प्रशासन ने मृतकों के शवों का पंचनामा भरकर उन्हें पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
होली के पावन पर्व पर जब लोग अपने घरों को लौट रहे हैं, तब इस तरह की घटना ने सड़क सुरक्षा पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर सफर करना हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन त्योहारों के दौरान वाहनों की अतिरिक्त भीड़ और जल्दबाजी अक्सर जानलेवा साबित होती है। इस घटना ने एक बार फिर यात्रियों को चेतावनी दी है कि वे सुरक्षित ड्राइविंग के मानकों का पालन करें। जिस घर में कल तक हंसी-मजाक और शादी के गीत गाए जा रहे थे, वहां आज सन्नाटा और अपनों को खोने का चीत्कार है। पूरा अल्मोड़ा जनपद इस दुखद घड़ी में पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहा है। प्रशासन ने भी लोगों से अपील की है कि वे पर्वतीय क्षेत्रों में वाहन चलाते समय गति सीमा का ध्यान रखें और सुरक्षित यात्रा को प्राथमिकता दें, ताकि किसी और परिवार की खुशियां इस तरह सड़क पर न बिखरें।

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