उत्तराखंड में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। सोमवार दोपहर बाद करीब तीन बजे बदरीनाथ धाम में अचानक बादल छा गए और तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई—वे छाते और रेनकोट के साथ मंदिर पहुंचे और दर्शन किए। बारिश ने गर्मी से राहत जरूर दिलाई, लेकिन यात्रियों के लिए कुछ समय तक परेशानी भी बढ़ा दी।
उधर, हेमकुंड साहिब और आसपास के ऊंचाई वाले क्षेत्रों जैसे नंदा घुंघटी, नीती और माणा घाटी में सीजन की बर्फबारी देखने को मिली। बर्फबारी के चलते क्षेत्र में ठंडक बढ़ गई है और तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। यह मौसम परिवर्तन जून की शुरुआत में उत्तराखंड की जलवायु में तेजी से हो रहे बदलाव का संकेत देता है।
मौसम विभाग के अनुसार, जून के पहले सप्ताह में प्री-मानसून की अच्छी बारिश होने की संभावना है, विशेषकर पहाड़ी जिलों में। विभाग के निदेशक बिक्रम सिंह ने जानकारी दी कि इस बार मानसून पांच दिन पहले यानी 10 जून तक उत्तराखंड पहुंचने की संभावना है। इससे पहले कई क्षेत्रों में हल्की बारिश होती रहेगी, जिसे प्री-मानसून शॉवर कहा जा सकता है।
राज्य में सामान्य रूप से मानसून के दौरान औसतन 87 सेंटीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस बार अनुमान है कि यह औसत छह प्रतिशत बढ़कर 108 फीसदी तक पहुंच सकता है। मानसून सक्रिय होने के बाद राज्य में बारिश की तीव्रता और अधिक बढ़ेगी, जिससे खेती और जल आपूर्ति में राहत मिलने की उम्मीद है।
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