देहरादून / उत्तरकाशी: उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौसम के मिजाज में आए अचानक बदलाव और निचले इलाकों तक बर्फ की मोटी परत जम जाने से पर्वतारोहण और ट्रैकिंग अभियानों पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। हिमालयी राज्यों में तेजी से गिरते तापमान और ऊंचे शिखरों पर भारी हिमपात के कारण High Himalayan Trekking Routes पर पर्यटकों और एडवेंचर प्रेमियों की आवाजाही को बेहद जोखिम भरा माना जा रहा है।
प्रशासन और पर्यटन विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सुरक्षा मानदंडों को सर्वोपरि रखते हुए इस सीजन में ऊंचाई वाले इलाकों के लिए परमिट जारी करने में खासी कड़ाई बरती जा रही है। इसके चलते इस साल उच्च पर्वतीय ट्रेक पर जाने का सपना देख रहे हजारों भारतीय और विदेशी पर्यटकों को निराशा हाथ लग सकती है। अब इन साहसिक यात्रियों को नए सिरे से अगले साल की गर्मियों या अनुकूल मौसम के सीजन का इंतजार करना होगा।
High Himalayan Trekking Routes पर क्यों बढ़ा खतरा?
उच्च हिमालयी इलाकों में अक्टूबर और नवंबर के महीनों से ही भीषण ठंड के साथ-साथ बर्फीली हवाएं चलना शुरू हो जाती हैं। लेकिन इस बार बदलते जलवायु पैटर्न और असमय बर्फबारी ने स्थितियों को अधिक गंभीर बना दिया है। कई प्रमुख मार्गों पर तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे पहुंच चुका है, जिससे न केवल रास्ते फिसलन भरे और खतरनाक हो गए हैं, बल्कि दृश्यता (Visibility) भी काफी कम हो गई है।
1. हिमस्खलन और लैंडस्लाइड की बढ़ती आशंका
बर्फ की ताजा परत जब पुराने ढलानों पर जमती है, तो हिमस्खलन (Avalanche) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। कई उच्च पर्वतीय मार्गों में ग्लेशियर की दरारें और पतले बर्फ के रास्ते ट्रेकर्स के लिए घातक साबित हो सकते हैं। हाल के समय में हुई बर्फबारी के कारण High Himalayan Trekking Routes के कई हिस्सों में रास्तों का पता लगा पाना भी मुश्किल हो गया है।
2. ऑक्सीजन का गिरता स्तर और अत्यधिक ठंड
4,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हवा का घनत्व काफी कम हो जाता है। बर्फीली तूफानी हवाओं और अचानक तापमान गिरने से ट्रेकर्स में हाइपोथर्मिया (Hypothermia), फ्रॉस्टबाइट और एक्यूट माउंटेन सिकनेस (AMS) जैसी गंभीर शारीरिक समस्याओं की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत मेडिकल हेल्प पहुंचाना या हेलीकॉप्टर रेस्क्यू करना भी बेहद जटिल हो जाता है।
High Himalayan Trekking Routes के लिए प्रशासन का कड़ा रुख और एडवाइजरी
पर्यटकों और स्थानिक गाइडों की सुरक्षा को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDRF/NDRF) ने कई सुरक्षा निर्देश जारी किए हैं।
मुख्य प्रशासनिक निर्देश:
- परमिट निलंबन: संवेदनशील और अत्यधिक ऊंचाई वाले High Himalayan Trekking Routes के लिए नए ट्रैकिंग परमिट जारी करने पर अस्थायी रोक लगाई गई है।
- जांच चौकियां: गंगोत्री, जोशीमठ, पिथौरागढ़ और हिमाचल के सीमावर्ती जांच चौकियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है ताकि बिना अनुमति कोई भी दल आगे न बढ़े।
- आपातकालीन रेस्क्यू टीम तैनात: संवेदनशील इलाकों में खोज एवं बचाव (Search and Rescue) दलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
है।
स्थानीय पर्यटन अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देना प्राथमिकता है, लेकिन किसी भी परिस्थिति में इंसानी जिंदगी को दांव पर नहीं लगाया जा सकता। जब तक मौसम स्थिर नहीं हो जाता और बर्फ के रास्ते सुरक्षित नहीं बनाए जाते, तब तक उच्च हिमालय में बड़े ट्रैकिंग अभियानों की अनुमति देना संभव नहीं है।
साहसिक पर्यटन उद्योग पर असर और ट्रेकर्स को अगली संभावना
असमय बर्फबारी और मौसम के इस सख्त रुख से स्थानीय ट्रैकिंग एजेंसियों, कुली (Porters), गाइड और होमस्टे संचालकों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। ऑपरेटरों का कहना है कि इस सीजन की अधिकांश बुकिंग रद्द करनी पड़ रही हैं या उन्हें अगले साल के लिए री-शेड्यूल किया जा रहा है।
पर्यटकों और एडवेंचर की चाह रखने वालों के लिए अब सबसे मुफीद सलाह यही है कि वे इस सीजन में रिस्क लेने से बचें। यदि कोई ट्रेकिंग का अनुभव लेना ही चाहता है, तो उन्हें कम ऊंचाई वाले (Low to Moderate Altitude) सुरक्षित ट्रेल्स का चुनाव करना चाहिए, जहां बर्फबारी का खतरा न्यूनतम हो और आपातकालीन सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हों।
जो ट्रेकर्स केवल High Himalayan Trekking Routes की दुर्गम चोटियों को फतह करने का लक्ष्य रखते हैं, उन्हें अब अगले साल अप्रैल-मई में मौसम खुलने और रास्ते साफ होने का इंतजार करना ही सबसे बुद्धिमानी भरा फैसला होगा।
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