पिथौरागढ़: उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ की व्यास घाटी में आयोजित होने वाली Adi Kailash Parikrama Run 2.0 इस बार धावकों के लिए साहस, सहनशक्ति और शारीरिक क्षमता की बड़ी परीक्षा बनने जा रही है। 24 से 26 अक्टूबर 2026 तक होने वाले इस आयोजन में प्रतिभागियों को हिमालय के दुर्गम रास्तों, कम ऑक्सीजन वाले वातावरण और कठिन चढ़ाई के बीच अपनी क्षमता साबित करनी होगी। आदि कैलाश क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता के बीच होने वाली यह दौड़ सामान्य मैराथन से काफी अलग है, क्योंकि यहां ऊंचाई और मौसम जैसी परिस्थितियां भी चुनौती को बढ़ाती हैं।
10 हजार से 15 हजार फीट तक की ऊंचाई बनेगी चुनौती
Adi Kailash Parikrama Run 2.0 की सबसे बड़ी चुनौती इसका हाई-एल्टीट्यूड रूट है। व्यास घाटी के गुंजी, नाबी, कुटी और ज्योलिंगकांग जैसे इलाकों से गुजरने वाले मार्ग समुद्र तल से लगभग 10,500 से 15,000 फीट तक की ऊंचाई पर स्थित हैं। इतनी ऊंचाई पर हवा में ऑक्सीजन का दबाव कम होने के कारण सांस लेने में परेशानी, जल्दी थकान और शरीर की ऊर्जा कम होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"
ऐसे में प्रतिभागियों के लिए केवल तेज दौड़ना ही पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें अपनी गति नियंत्रित रखने, शरीर की स्थिति पर नजर रखने और जरूरत के अनुसार आराम करने की भी आवश्यकता होगी। ऊंचाई पर दौड़ने का अनुभव नहीं रखने वाले खिलाड़ियों के लिए यह आयोजन विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ
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बर्फीले रास्ते और दुर्गम पहाड़ी भूभाग
हिमालयी क्षेत्र में मौसम तेजी से बदल सकता है। ठंड, तेज हवाएं, पथरीले रास्ते और ऊंचाई वाले इलाकों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियां धावकों की मुश्किल बढ़ा सकती हैं। पहाड़ी रास्तों पर चढ़ाई और उतराई के दौरान संतुलन बनाए रखना भी जरूरी होगा। ऐसे में प्रतिभागियों की शारीरिक फिटनेस के साथ-साथ मानसिक मजबूती और तैयारी की भी परीक्षा होगी।
प्रशासन और आयोजन से जुड़े विभागों के लिए भी मार्ग को सुरक्षित बनाए रखना महत्वपूर्ण है। तैयारियों के तहत रास्ते में मौजूद मलबे और अवरोधों को हटाने, चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने पर जोर दिया गया है।
70 किलोमीटर अल्ट्रा रन होगी सबसे बड़ी परीक्षा
इस आयोजन में अलग-अलग दूरी की दौड़ रखी गई हैं, ताकि विभिन्न स्तर के धावक हिस्सा ले सकें। इनमें 70 किलोमीटर अल्ट्रा रन सबसे कठिन श्रेणियों में शामिल है। इसका मार्ग ज्योलिंगकांग से शुरू होकर छियालेख तक जाएगा और फिर गुंजी में समाप्त होगा। इस दूरी को तय करने के लिए प्रतिभागियों को लंबी अवधि तक अपनी ऊर्जा और सहनशक्ति बनाए रखनी होगी।
इसके अलावा 42 किलोमीटर फुल मैराथन, 21 किलोमीटर हाफ मैराथन और 10 तथा 5 किलोमीटर की दौड़ भी आयोजित होंगी। 70 और 42 किलोमीटर की दौड़ 24 अक्टूबर को, जबकि 21, 10 और 5 किलोमीटर की दौड़ 25 अक्टूबर को निर्धारित हैं। 26 अक्टूबर को माउंटेन टेरेन बाइकिंग का आयोजन भी प्रस्तावित है।
सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर प्रशासन का जोर
धावकों की सुरक्षा को देखते हुए पिथौरागढ़ जिला प्रशासन ने तैयारियों की समीक्षा की है। अधिकारियों को मार्ग पर डॉक्टरों, एंबुलेंस, चिकित्सा सहायता केंद्रों और पेयजल व स्नैक्स की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। हाइड्रेशन प्वाइंट की स्पष्ट पहचान और आपातकालीन सहायता की उपलब्धता पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
ऊंचाई वाले क्षेत्र में दौड़ने के दौरान स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए प्रतिभागियों के लिए निर्धारित स्वास्थ्य प्रमाणपत्र, जरूरी उपकरण और आयोजन के दिशा-निर्देशों का पालन करना अहम होगा।
सीमांत पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
Adi Kailash Parikrama Run 2.0 केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि उत्तराखंड में साहसिक और सीमांत पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल भी है। आयोजन के जरिए आदि कैलाश क्षेत्र की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को व्यापक स्तर पर सामने लाने की कोशिश की जा रही है। इससे गुंजी, नाबी और कुटी जैसे गांवों में होमस्टे, भोजन और स्थानीय सेवाओं से जुड़े लोगों को आर्थिक अवसर मिल सकते हैं।
इस बार आयोजन में करीब 1,000 प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना जताई गई थी, जबकि एक अन्य रिपोर्ट में पंजीकरण की संख्या 1,300 बताई गई। कुल मिलाकर, दुर्गम हिमालयी भूभाग में आयोजित होने वाली यह दौड़ खिलाड़ियों के लिए चुनौती और सीमांत क्षेत्र के लिए पर्यटन की नई संभावनाएं लेकर आई है।






