Haridwar Ardh Kumbh की भव्य तैयारियों के बीच धर्मनगरी हरिद्वार में एक बड़ा प्रशासनिक तालमेल का अभाव देखने को मिला है। बुधवार की सुबह ऊपरी गंगनहर में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग द्वारा अचानक करीब 6,500 क्यूसेक पानी छोड़ दिए जाने के कारण निर्माणाधीन घाटों पर अफरातफरी का माहौल बन गया। क्षमता से लगभग दोगुना पानी आ जाने से नहर के तटवर्ती क्षेत्रों में तेजी से जलस्तर बढ़ गया, जिससे निर्माण कार्यों पर सीधा असर पड़ा है।
आगामी Haridwar Ardh Kumbh मेले को ध्यान में रखते हुए हरिद्वार शहर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नए घाटों के निर्माण का काम युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। शासन स्तर पर लगातार बैठकें आयोजित कर अधिकारियों को तय समयसीमा के भीतर निर्माण कार्य पूरा करने के सख्त निर्देश दिए जा रहे हैं। लेकिन बिना पूर्व सूचना के इतना भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने से प्रशासनिक विभागों के आपसी समन्वय की पोल खुलकर सामने आ गई है।
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Haridwar Ardh Kumbh: ऋषिकुल से ज्वालापुर तक बिगड़े हालात
उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग द्वारा अचानक अतिरिक्त पानी छोड़े जाने के कारण ऋषिकुल पुल के आसपास के इलाकों से लेकर ज्वालापुर तक गंगनहर के किनारों पर बाढ़ जैसा दृश्य उत्पन्न हो गया।
स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ
- घाट जलमग्न: निर्माणाधीन नए घाटों के निचले हिस्से पूरी तरह पानी में डूब गए।
- मशीनरियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया: अचानक बढ़े जलस्तर को देख वहां काम कर रहे मजदूर जान बचाकर भागे और निर्माण कार्य में लगी मशीनों व उपकरणों को आनन-फानन में सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया।
- सामग्री बहने का खतरा: सीमेंट, रोड़ी और सरिया जैसी भारी मात्रा में रखी निर्माण सामग्री के जलमग्न होने से बड़े नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
Haridwar Ardh Kumbh: विभागाध्यक्षों के समन्वय पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरी घटना ने उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग और उत्तराखंड के मेला प्रशासन के बीच बेहतर संवाद के दावों की हवा निकाल दी है। Haridwar Ardh Kumbh के विशाल आयोजन के लिए अंतरराज्यीय विभागों का समन्वय बेहद अनिवार्य माना जाता है।
स्थानिय ठेकेदारों और अधिकारियों का कहना है:
“यदि नहर में इतना भारी डिस्चार्ज छोड़ा जाना था, तो इसकी पूर्व सूचना निर्माण एजेंसियों को दी जानी चाहिए थी। अचानक जलस्तर बढ़ने से न केवल काम रुक गया, बल्कि कंक्रीट और स्ट्रक्चरल काम को भी नुकसान पहुंचा है।”
Haridwar Ardh Kumbh: नवंबर की समयसीमा पिछड़ने का बढ़ा खतरा
मेला प्रशासन की ओर से गंगनहर पर बन रहे सभी नए घाटों और सुंदरीकरण के प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए नवंबर की डेडलाइन तय की गई है। आगामी स्नान पर्वों और तैयारियों को समय से अंतिम रूप देने के लिए दिन-रात काम चल रहा है।
| क्षेत्र/बिंदु | वर्तमान स्थिति | संभावित प्रभाव |
|---|---|---|
| जल स्तर (Discharge) | लगभग 6,500 क्यूसेक | क्षमता से करीब दोगुना प्रवाह |
| प्रभावित क्षेत्र | ऋषिकुल से ज्वालापुर | निर्माणाधीन घाट जलमग्न |
| निर्माण समयसीमा | नवंबर का लक्ष्य | काम में देरी होने की आशंका |
| विभागीय समन्वय | UP सिंचाई विभाग बनाम मेला प्रशासन | तालमेल की भारी कमी |
यदि गंगनहर में जलस्तर इसी तरह अनियंत्रित रहा या निर्माण स्थल को सुखाने में अतिरिक्त समय लगा, तो तय समयसीमा खिसक सकती है। इससे Haridwar Ardh Kumbh की मुख्य तैयारियों की रफ्तार पर ब्रेक लग सकता है।
आगे क्या है चुनौती?
घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने मौके का जायजा लिया है। गंगनहर के डिस्चार्ज को नियंत्रित करने और जलस्तर घटाने के लिए उच्च स्तर पर वार्ता शुरू की गई है। अधिकारियों का दावा है कि स्थिति पर जल्द काबू पाकर घाटों का निर्माण कार्य दोबारा गति पकड़ लेगा। हालांकि, इस घटना से सबक लेते हुए भविष्य में गंगनहर की बंदी और पानी के प्रवाह को लेकर सख्त गाइडलाइंस बनाने की मांग उठ रही है।
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