Indira Ekadashi 2026: 7 Powerful Rules for Puja Paran Time
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Indira Ekadashi 2026: आज रखा जा रहा इंदिरा एकादशी व्रत, जानें पूजा मुहूर्त से पारण तक पूरी जानकारी

On: October 6, 2026 6:33 AM
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Indira Ekadashi 2026 puja muhurat, fasting rules and paran time

Indira Ekadashi 2026: पितृपक्ष के बीच आने वाली एकादशी तिथि का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली इंदिरा एकादशी को भगवान विष्णु की आराधना और पितरों की शांति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। साल 2026 में इंदिरा एकादशी का व्रत मंगलवार, 6 अक्टूबर को रखा जा रहा है। इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।

मान्यता के अनुसार इंदिरा एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर मिलता है। हालांकि, व्रत और पूजा से जुड़े मुहूर्त स्थानीय पंचांग के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकते हैं। इसलिए पूजा या पारण के लिए अपने क्षेत्र के पंचांग को भी देखना उचित माना जाता है।

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कब से शुरू हुई इंदिरा एकादशी की तिथि?

Indira Ekadashi 2026 की एकादशी तिथि 6 अक्टूबर को सुबह 2 बजकर 7 मिनट से शुरू होने की जानकारी दी गई है। यह तिथि 7 अक्टूबर की मध्यरात्रि 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर इस साल इंदिरा एकादशी का व्रत 6 अक्टूबर को रखा जा रहा है।

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एकादशी व्रत रखने वाले श्रद्धालु सुबह स्नान और पूजा के बाद भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प ले सकते हैं। दिनभर अपनी क्षमता और परंपरा के अनुसार व्रत रखा जाता है।

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर करें दिन की शुरुआत

इंदिरा एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:41 बजे से 5:29 बजे तक बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय उठकर स्नान, ध्यान और भगवान का स्मरण करना शुभ माना जाता है।

सुबह की पूजा से पहले घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई करने के बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाया जा सकता है। इसके बाद व्रत का संकल्प लेकर पूजा की शुरुआत की जाती है।

पूजा का शुभ समय कब रहेगा?

6 अक्टूबर को इंदिरा एकादशी की पूजा के लिए दोपहर 11:46 बजे से 12:34 बजे तक का समय शुभ बताया गया है। इस दौरान भगवान विष्णु की विधिवत पूजा की जा सकती है।

पूजा में पीले फूल, तुलसी दल, अक्षत, धूप और दीप का इस्तेमाल किया जाता है। भगवान विष्णु को पीले फल या सात्विक भोग अर्पित करने की भी परंपरा है। इसके बाद इंदिरा एकादशी की व्रत कथा का पाठ या श्रवण किया जा सकता है।

शाम के समय भी भगवान विष्णु के सामने दीपक जलाकर आरती करने और भक्ति भाव से प्रार्थना करने की परंपरा है।

इंदिरा एकादशी की पूजा विधि क्या है?

व्रत रखने वाले श्रद्धालु सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें। इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें और उन्हें फूल, तुलसी, अक्षत, धूप और दीप अर्पित करें।

पूजा के दौरान विष्णु मंत्र का जाप और एकादशी व्रत कथा का श्रवण किया जा सकता है। इसके बाद भगवान को फल या अन्य सात्विक सामग्री का भोग लगाएं। दिनभर मन को शांत रखने और धार्मिक गतिविधियों में समय बिताने की कोशिश की जाती है।

एकादशी के दिन नकारात्मक विचारों, क्रोध और विवाद से दूर रहने की सलाह धार्मिक परंपराओं में दी जाती है। रात में भी भगवान विष्णु का स्मरण और भजन किया जा सकता है।

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व्रत में क्या खा सकते हैं?

जो लोग फलाहार के साथ इंदिरा एकादशी का व्रत रखते हैं, वे अपनी परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार कुछ फलाहारी चीजों का सेवन कर सकते हैं। कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बनी चीजें, साबूदाना, आलू और सेंधा नमक का इस्तेमाल कई व्रतों में किया जाता है।

इसके अलावा ताजे फल, दूध, दही, मखाना और सूखे मेवे जैसे बादाम आदि भी फलाहार में शामिल किए जाते हैं। व्रत के दौरान पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है, खासकर उन लोगों के लिए जो निर्जला व्रत नहीं रखते।

किन चीजों से रहना चाहिए दूर?

एकादशी व्रत की परंपराओं में अन्न का सेवन न करने का विशेष महत्व माना जाता है। इसलिए गेहूं, चावल, जौ और दालों सहित सामान्य अनाज से परहेज किया जाता है।

इसके अलावा मांसाहार, मदिरा और अन्य तामसिक खाद्य पदार्थों से दूर रहने की परंपरा है। कई परिवारों में प्याज और लहसुन का सेवन भी इस दिन नहीं किया जाता। हालांकि व्रत के नियम अलग-अलग परंपराओं और परिवारों में अलग हो सकते हैं।

यदि कोई व्यक्ति व्रत नहीं रख रहा है, तब भी धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन सात्विक भोजन और शांत वातावरण बनाए रखने पर जोर दिया जाता है।

इंदिरा एकादशी का पारण कब होगा?

व्रत का समापन अगले दिन यानी 7 अक्टूबर को किया जाएगा। दी गई जानकारी के अनुसार पारण का समय सुबह 6:17 बजे से 8:38 बजे के बीच रहेगा।

व्रत रखने वालों को पारण के लिए अपने स्थानीय पंचांग में दिए गए समय की पुष्टि करनी चाहिए। पारण के समय भगवान विष्णु का स्मरण करने के बाद भोजन या फलाहार ग्रहण करके व्रत पूरा किया जा सकता है।

पितृपक्ष में क्यों खास है इंदिरा एकादशी?

इंदिरा एकादशी पितृपक्ष के दौरान पड़ने के कारण इसे विशेष धार्मिक महत्व वाला व्रत माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ अपने पूर्वजों का स्मरण करते हैं और उनकी शांति के लिए प्रार्थना करते हैं।

इस दिन का मुख्य उद्देश्य आस्था, संयम और भगवान विष्णु की भक्ति से जुड़ा माना जाता है। व्रत रखने वाले लोगों को अपनी शारीरिक क्षमता का भी ध्यान रखना चाहिए। किसी बीमारी, गर्भावस्था, कमजोरी या चिकित्सकीय स्थिति में उपवास रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना उचित है।

नोट: पूजा मुहूर्त और पारण समय स्थान के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है। धार्मिक अनुष्ठान करने से पहले स्थानीय पंचांग या विद्वान से समय की पुष्टि करें।

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